खेल का खेल
नमस्कार!
हालचाल ठीक है. कुछ दिनों से क्रिकेट घोटाला चर्चा में है. क्रिकेट का खेल अंग्रेज भारत लेकर आये. क्रिकेट देखना और उसकी बात किये बिना बुद्धिजीवि नहीं हुआ ज सकता है ,इसलिये सभी बुद्धिजीवि इसपर बात करना सम्पादकीय लिख्नना पसन्द करते हैं . धर्म को अन्धविश्वास मानते हुये खिलाडी को भगवान भी बना देते हैं. जब रेडियो से कमेन्टरी का प्रसारण हुआ करता था तो कार्यालय प्रसारण घर बन जाया करते थे.कुछ दया करके आधी कमेन्ट्री हिन्दी में भी हो जाती थी. अब तो लाइव प्रसारण हो रहा है, अरबों खरबों का विज्ञापन पीछे- पीछे घूम रहा है. सिनेमा और क्रिकेट खेल के टिकट का ब्लैक तब से चल रहा है जब से ब्लैक मारकेट चल रहा है. जुआ का खेल भी प्रागैतिहासिक काल से चला आ रहा है. क्रिकेट के खेल में जुये की जुगलबन्दी अति प्राचीन है. अधिक और निश्चित कमाई के लिये जुये में बेईमानी होती ही है अतः गेम फिक्सिंग चालू हो गई. जहां गुड वहां चींटे. अतः राजनेता खेल के मालिक हो गये. तो खेल स्वास्थ्य के लिये नहीं पैसे के लिये खेली जाती है.
इसलिये "खेल" जारी है. जबरोजमर्रा की समस्यायें अधिक कष्ट देने लगें तो, संगीत और खेल शासकों के लिये बडे लाभकर होते हैं. अब तो धनकारक भी हो गये हैं. देश का खेल मन्त्रालय सभी नागरिकों के लिये खेल के साधन जुटाने में नही लगता , कुछ को चुनकर काम चला लेता है. इस समय घोटले के आरोपों से घिरी सरकार के लिये खेल में फिक्सिंग का खेल वास्तव में औषधि का काम कर गयी.
नमस्कार.
नमस्कार!
हालचाल ठीक है. कुछ दिनों से क्रिकेट घोटाला चर्चा में है. क्रिकेट का खेल अंग्रेज भारत लेकर आये. क्रिकेट देखना और उसकी बात किये बिना बुद्धिजीवि नहीं हुआ ज सकता है ,इसलिये सभी बुद्धिजीवि इसपर बात करना सम्पादकीय लिख्नना पसन्द करते हैं . धर्म को अन्धविश्वास मानते हुये खिलाडी को भगवान भी बना देते हैं. जब रेडियो से कमेन्टरी का प्रसारण हुआ करता था तो कार्यालय प्रसारण घर बन जाया करते थे.कुछ दया करके आधी कमेन्ट्री हिन्दी में भी हो जाती थी. अब तो लाइव प्रसारण हो रहा है, अरबों खरबों का विज्ञापन पीछे- पीछे घूम रहा है. सिनेमा और क्रिकेट खेल के टिकट का ब्लैक तब से चल रहा है जब से ब्लैक मारकेट चल रहा है. जुआ का खेल भी प्रागैतिहासिक काल से चला आ रहा है. क्रिकेट के खेल में जुये की जुगलबन्दी अति प्राचीन है. अधिक और निश्चित कमाई के लिये जुये में बेईमानी होती ही है अतः गेम फिक्सिंग चालू हो गई. जहां गुड वहां चींटे. अतः राजनेता खेल के मालिक हो गये. तो खेल स्वास्थ्य के लिये नहीं पैसे के लिये खेली जाती है.
इसलिये "खेल" जारी है. जबरोजमर्रा की समस्यायें अधिक कष्ट देने लगें तो, संगीत और खेल शासकों के लिये बडे लाभकर होते हैं. अब तो धनकारक भी हो गये हैं. देश का खेल मन्त्रालय सभी नागरिकों के लिये खेल के साधन जुटाने में नही लगता , कुछ को चुनकर काम चला लेता है. इस समय घोटले के आरोपों से घिरी सरकार के लिये खेल में फिक्सिंग का खेल वास्तव में औषधि का काम कर गयी.
नमस्कार.