Friday, March 25, 2011

महंगाई भत्ता पर सम्पादकीय

नमस्कार! 
कोई दैनिक अखबार किसी आम बात पर सम्पादकीय लिखे तो वह जरूर कोई ख़ास बात है.भारत सरकार के सरकारी कर्मचारियों को हर एक जुलाई और एक जनवरी को पिछले छः माह में बढे थोक सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ते की एक किश्त देय हो जाती है. सरकारी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और सरकारी बैंकों के कर्मचारियों को यह राहत हर तीसरे महीने ही प्राप्त हो जाती है. प्रत्येक दस वर्षों पर वेतन आयोग गठित होता है तथा प्रायः दस वर्षों में बढी हुई मंहगाई के आधार पर वेतन मान निर्धारित होते हैं. 

यह प्रक्रिया सरकार को करनी होती है किन्तु सरकार इसे नियोजित ढंग से कभी नहीं करती तथा यह एक वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया न होकर एक राजनैतिक प्रक्रिया बन गई है तथा महंगाई को बढाने में खूब योगदान करती है. प्रांतीय सरकारे तथा मीडिया इसे ऎसी घटना के रूप में प्रकाशित करते हैं जैसे कोई नई घटना हो रही है. सरकार्रें पिछले आयोग के सुझावों को जबतक लागू कर पाती है तब तक नए आयोग के गठन का समय आ जाता है. कर्मचारी संघों की मांग शरू हो जाती तब आयोग  गठित होता है आयोग की सिफारिशें आते आते इतना देर हो जाता है की बकाया वेतन भुगतान की नौबत आ जाती है. इस प्रकार एरियर  भुगतान और नई आर्थिक समस्या निरंतर जारी रहती है.

अगले वेतनं आयोग के सुझाव एक जनवरी २०१६ से लागू हो जाने चाहिए. यदि हमारी सरकार २०१४ में ही सातवाँ आयोग बना दे तथा अक्टूबर २०१५ तक सुझाव आ जाय तो एक जनवरी २०१६ से नए वेतन मान में भुगतान होने लगेगा तब  किसी एरियन के भुगतान की समस्या भी नहीं आयेगी. इसी प्रकार सरकारें प्रत्येक १५जनवरी तथा १५ जुलाई को  महंगाई  भत्ते की घोषणा कर दे तो वेतन के एरियर की समस्या समाप्त हो जायगी. 

ऎसी स्थिति में सम्पादक महोदय की टिप्पणी असंगत प्रतीत होती है. अब दूसरी बात पर आते हैं. कर्मचारियों के काम काज के सुधार की बात. सबसे पहले हमारे माननीय सांसद जो सरकार से वेतन और भत्ता तो पाते हैं किन्तु संसद में उनकी उपस्थिति पर कुछ लिखना आवश्यक नहीं हैं सभी जानते हैं. यही हाल माननीय मंत्रियों का है. ये लोग जब तक अपनी कार्य संस्कृति में सुधार नहीं लायेगे तबतक कर्मचारी कैसे सुधरेंगे. http://epaper.hindustandainik.com/PUBLICATIONS/HT/HT/2011/03/23/ArticleHtmls/I%C2%B8F%C3%8A%C2%A8FFdS%C2%B9F%C3%BB%C3%94-I%C3%BB-SFW%C2%B0F-23032011012001.shtml?Mode=1  

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