Sunday, July 21, 2013

आयकर

नमस्कार!

हालचाल तो ठीक है किन्तुआज आयकर के बारे में कुछ सूचनायें देखने को मिलीं. आयकर विभाग मध्यवर्ग के नौकरों (नौकरी करने वाले ) को बहुत डराती है. आयकर विभाग जो भी चिठ्ठी भेजता है उसमें सजा की धमकी जरूर रहती है. हर कार्यालय में आयकर गणना  की चर्चा होती रहती है. कुछ वर्षों पूर्व आयकर की गणना और सूचना भेजने के लिये एक सीडी  की चर्चा चली किन्तु अभी तक आयकर विभाग यह सीडी टीडीयस अधिकारियों को नहीं भेज सका.

अभी धारा ८० सी के तहत सभी को दो लाख की ही छूट मिलती है चाहे आप की आमदनी  चार लाख प्रति वर्ष हो या दस लाख प्रति वर्ष.यह छूट तो आमदनी आधारित होनी चाहिये.  चाहे आप अकेले  हों या आपके दस आश्रित हों. आय कर तो प्रतिव्यक्ति आमदनी पर होना चाहिये. आपकी आमदनी अधिक होती है तो व्यय भी अधिक होता है और आप व्यय पर भी विविध प्रकार के कर देते हैं. इसी कारण व्यक्तिगत आयकर न लेने का भी सुझाव आता है किन्तु सरकार इसे नहीं सुनती.

इस देश के तमाम लोग जो नौकरी नहीं करते वे कितना आयकर  देते हैं, सभी जानते हैं. किन्तु डिफाल्टरों का जमाना है सरकार एक आध डिफाल्टरों को पकड कर चुप हो जाती है. और मध्यवर्ग के नौकरों के बच्चे दूध, फल, सब्जी और अखबार क पैसा आयकर के रूप में जमाकर सर पीट्कर रह जाते हैं.

आयकर देने वालों को एक पैन कार्ड भी सरकार अपने व्यय पर नहीं दे पाती और जो बनवाते हैं उसपर आवास का पता नहीं होता, अर्थात आप उस कार्ड का उपयोग बैंक का खाता खुलवाने या सिमकार्ड लेने में नहीं कर सकते. है न सोचनीय बात कि जो व्यक्ति आय्कर विभाग को लखों दे देता है सरकार बदले में उसे एक आवासीय पता का प्रमाण पत्र भी नहीं दे पाती.

यदि आप आयकर दाता हो गये तो गये काम से यह सरकार आपके कल्याण के लिये कुछ नहीं कर सकती. न चिकित्सा करायेगी न दुर्घटना पर पूछेगी न मरने पर पूछेगी.

इसलिये बन्धुओं यदि मेरी बात से सहमत हों तो इसे शेयर करें, राजदलों पर दबाव बनाये कि आयकर आयकर दाता के परिवार के सदस्यों कभी ध्यान रखे. उसके आयकर का एक मामूली अंश सामूहिक चिकित्सा बीमा में भी भेजे. उसका सामुहिक बीमा कराये और वह जब तक कर देता है उसकी करदेयता के आधार पर उसे बीमा धन मिले..........