नमस्कार!
हालचाल ठीक है.
रविवार का दिन, धूप का अभाव, फेसबुक की खींच, टीवी की खींच, रजाई की खींच हीटर की खीच .......फेसबुक ही जीत जाता है. कभी-कभी ब्लाग भी.
इस जाडे में मफलर और चाय में जंग हो रही है. मफलर वाला भी नया है. चायवाला अचानक चायवाला बन गया. विज्ञापन कम्पनियां जिसको जब चाहे नककटवा बना दें.
केजरीवाल की हिट्लिस्ट पुआल की आग जैसे गर्मी दे रही है. सर्वविदित रहस्य की चर्चा जब कोई करता है तो सभी प्रमाण मांगते हैं. इस देश के बहुत सारे सत्य कभी कचहरी में प्रमाणित नहीं हो सकते. कोई राजदल यह नहीं दावा कर सकता कि उसके शासन काल में काला धन नहीं बनेगा.
आजकल आरोप लग रहा है कि केजरीवाल को शासन करने नहीं आता. आरोप लगाने वाले अपने शासन को देखते ही नहीं. दिल्ली में पुलिस ( गृहमंत्री) की कार्य कुशलता रोज ही दिखाई देती है.
किसी भी दूर जाने वाली रेलगाडी ( रेल मंत्रालय ) में टिकट भारत निर्माण और शाइनिंग इंडिया दोनों की याद दिला देता है.
सेना की स्थिति और सैन्य साजो-सामान की शीघ्र आपूर्ति और नियुक्तियां (रक्षा मंत्रालय ) की कार्य कुशलता बताती रहतीं हैं
इस देश में बिकनेवाले तमाम साजोसामान भारतीय भाषा में निर्देश भी नहीं देते हैं. तमाम वैधानिक चेतावनियों को पढने के लिये सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है. ( गृह मंत्रालय ) की कार्य कुशलता.
पूरे देश में कुछ स्थानों को छोडकर किसी को भी समय से रसोई गैस की आपूर्ति नहीं हो पाती. आपूर्ति कोई मुद्दा भी नही है. रात को दो बजे से लाइन लगाने वाले जिन्दाबाद. ( पेट्रोल मंत्रालय की कार्य कुशलता)
देश के सभी पढनेवालों के लिये शिक्षा संस्थान नहीं है. छात्रों का अधिकाधिक समय प्रतीक्षा में ही कट जाता है. यहां तक कि दिल्ली में भी विद्यालयों की कमी है. (शिक्षा मंत्रालय की कार्य-कुशलता)
न्यायालयों में लम्बित पडे मुकदमें विधि मंत्रालय की कार्यकुशलता दिखाते हैं.
यह सब देखने के बाद लगता है कि " आप" को कुछ दिया जाना चाहिये.
आप को छूट की आशा नहीं करनी चाहिये. आप का मूल्यांकन प्रतिदिन के हिसाब से किया जाना चाहिये. दिल्ली सरकार के प्रत्येक मंत्रालय का काम तीब्र गति से होना चाहिये. मैंने कहीं पढा था कि बिडला की कम्पनी में प्रतिदिन की पडता प्रडाली से मूल्यांकन होता है. "आआप" को इसे दिल्ली सरकार के कार्य प्रणाली के लिये उपयोग में लाना चाहिये. इसके लिये मूल्यांकन की एक वस्तुनिष्ठ प्रणाली विकसित कि जानी चाहिये. आज के जमाने में किसी को सच या झूठ सिद्ध करना मीडिया के हाथ में है.
भारती जी के छापे को लेकर बहुत आलोचनायें हुईं. किन्तु अभी तक वस्तुस्थिति सामने नहीं आ सकी.
तमाम आलोचक आप की आलोचना खाप को लेकर भी कर रहे है.
कुछ अति महत्वाकांक्षी लोग आप के सदस्य बने हैं. आये दिन कुछ लोग आप की आलोचना कर अपनी छवि बनायेंगे. दूसरे दलों में जगह बनाने के लिये यह एक अच्छा अवसर है. मोबाइल से आप का सदस्य बनिये सौ ऐसे ही सदस्यों के सहारे दूसरे दल में अपना टिकट पक्का कीजिये.
राजनीति में बाहुबल, धनबल, जनबल सभी से अधिक बलवान छलबल है. लंगीबाजी राजनीति भी चलती रहती है.
आम आदमी भी आज की राजनीति में केवल यही जानना चाहता है कि कौन जीतेगा.?
वास्तविक प्रश्न है किसे मत दें दल को या व्यक्ति को?
चुनाव की कसौटी क्या है?
हमें अपने निर्णय पर रहना चाहिये या जीतनेवाले के साथ हो जाना चहिये.
नमस्कार.
हालचाल ठीक है.
रविवार का दिन, धूप का अभाव, फेसबुक की खींच, टीवी की खींच, रजाई की खींच हीटर की खीच .......फेसबुक ही जीत जाता है. कभी-कभी ब्लाग भी.
इस जाडे में मफलर और चाय में जंग हो रही है. मफलर वाला भी नया है. चायवाला अचानक चायवाला बन गया. विज्ञापन कम्पनियां जिसको जब चाहे नककटवा बना दें.
केजरीवाल की हिट्लिस्ट पुआल की आग जैसे गर्मी दे रही है. सर्वविदित रहस्य की चर्चा जब कोई करता है तो सभी प्रमाण मांगते हैं. इस देश के बहुत सारे सत्य कभी कचहरी में प्रमाणित नहीं हो सकते. कोई राजदल यह नहीं दावा कर सकता कि उसके शासन काल में काला धन नहीं बनेगा.
आजकल आरोप लग रहा है कि केजरीवाल को शासन करने नहीं आता. आरोप लगाने वाले अपने शासन को देखते ही नहीं. दिल्ली में पुलिस ( गृहमंत्री) की कार्य कुशलता रोज ही दिखाई देती है.
किसी भी दूर जाने वाली रेलगाडी ( रेल मंत्रालय ) में टिकट भारत निर्माण और शाइनिंग इंडिया दोनों की याद दिला देता है.
सेना की स्थिति और सैन्य साजो-सामान की शीघ्र आपूर्ति और नियुक्तियां (रक्षा मंत्रालय ) की कार्य कुशलता बताती रहतीं हैं
इस देश में बिकनेवाले तमाम साजोसामान भारतीय भाषा में निर्देश भी नहीं देते हैं. तमाम वैधानिक चेतावनियों को पढने के लिये सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है. ( गृह मंत्रालय ) की कार्य कुशलता.
पूरे देश में कुछ स्थानों को छोडकर किसी को भी समय से रसोई गैस की आपूर्ति नहीं हो पाती. आपूर्ति कोई मुद्दा भी नही है. रात को दो बजे से लाइन लगाने वाले जिन्दाबाद. ( पेट्रोल मंत्रालय की कार्य कुशलता)
देश के सभी पढनेवालों के लिये शिक्षा संस्थान नहीं है. छात्रों का अधिकाधिक समय प्रतीक्षा में ही कट जाता है. यहां तक कि दिल्ली में भी विद्यालयों की कमी है. (शिक्षा मंत्रालय की कार्य-कुशलता)
न्यायालयों में लम्बित पडे मुकदमें विधि मंत्रालय की कार्यकुशलता दिखाते हैं.
यह सब देखने के बाद लगता है कि " आप" को कुछ दिया जाना चाहिये.
आप को छूट की आशा नहीं करनी चाहिये. आप का मूल्यांकन प्रतिदिन के हिसाब से किया जाना चाहिये. दिल्ली सरकार के प्रत्येक मंत्रालय का काम तीब्र गति से होना चाहिये. मैंने कहीं पढा था कि बिडला की कम्पनी में प्रतिदिन की पडता प्रडाली से मूल्यांकन होता है. "आआप" को इसे दिल्ली सरकार के कार्य प्रणाली के लिये उपयोग में लाना चाहिये. इसके लिये मूल्यांकन की एक वस्तुनिष्ठ प्रणाली विकसित कि जानी चाहिये. आज के जमाने में किसी को सच या झूठ सिद्ध करना मीडिया के हाथ में है.
भारती जी के छापे को लेकर बहुत आलोचनायें हुईं. किन्तु अभी तक वस्तुस्थिति सामने नहीं आ सकी.
तमाम आलोचक आप की आलोचना खाप को लेकर भी कर रहे है.
कुछ अति महत्वाकांक्षी लोग आप के सदस्य बने हैं. आये दिन कुछ लोग आप की आलोचना कर अपनी छवि बनायेंगे. दूसरे दलों में जगह बनाने के लिये यह एक अच्छा अवसर है. मोबाइल से आप का सदस्य बनिये सौ ऐसे ही सदस्यों के सहारे दूसरे दल में अपना टिकट पक्का कीजिये.
राजनीति में बाहुबल, धनबल, जनबल सभी से अधिक बलवान छलबल है. लंगीबाजी राजनीति भी चलती रहती है.
आम आदमी भी आज की राजनीति में केवल यही जानना चाहता है कि कौन जीतेगा.?
वास्तविक प्रश्न है किसे मत दें दल को या व्यक्ति को?
चुनाव की कसौटी क्या है?
हमें अपने निर्णय पर रहना चाहिये या जीतनेवाले के साथ हो जाना चहिये.
नमस्कार.