नमस्कार!
हालचाल गरम है.
राजनीति में हारे हुये राजद्लों के नेता जो सुपरनेता के चमत्कार से जीतने की सोच रहे थे अब हारने पर अपनी करनी पर कम नेता की करनी पर अधिक गुस्सा कर रहे हैं. इन दलों की हाल चाल गरम है.
मुझे गर्मी बहुत सताती है फिर भी प्रर्यावरण वालों की बात सोचकर रोज अखबार देखता हूं कि अब लिखा रहे कि गर्मी का नया रिकार्ड बना, लेकिन अभी तक नहीं दिखाई दिया.
पुराने मत से मृगशिर नक्षत्र चल रहा है. २३ जून तक दिन बडा होता चला जायेगा तो गर्मी अब नहीं पडेगी तो कब ? देवरिया मेम पुरवा चल रही है, लोकप्रचलित है कि पुरवा हवा भीतर से गर्म होती है. आठ बजे से ही पुरवा में बसी नमी भाप बन जाती है और गर्मी के साथ साथ हवा की कमी का अनुभव भी होने लगता है. प्यास बुझती ही नहीं, गर्मी में पानी की कमी एक स्ट्रोक के रूप प्राण भी ले लेती है.
अभी पानी की अनुपल्ब्धता के कारण एक खिलाडी की मौत से कुछ अतीत के जलकष्ट प्रकट हो गये. १९६२-६३ में जून में रात में गोरखपुर से लाररोड आना था. पहले तो टिकट पाना ही मुश्किल रहा. बाबूजी के एक परिचित जो वहीं कार्यरत थे टिकट दिलवा दिये. गाडी में बैठने के बाद मुझे प्यास लगी, अब ट्रेन चलने को थी. तब बगल में बैठे एक भोजपुरी के कवि ने अपना लोटा दिया और किसी ने लोटा भरकर पानी ला दिया. उन्होंने लोटा या गिलास लेकर ही यात्रा करने की सलाह भी दी.
एकबार इसी तरह के मौसम में इलाहाबाद की यात्रा में जा रहा था तब टू टियर वाले डिब्बे भी चलते थे, जिसमें ऊपर वाली बर्थ सोने के लिये तथा नीचेवाली बैठने के लिये होती थी. डिब्बे में बहुत भीड भी थी. किसी के पास लोटा था. उसने किसी प्रकार दूर नल से पानी मंगा लिया. पानी पी ही रहा था कि एक छोटा बच्चा पानी के लिये चिल्लाने लगा. लोगों के अनुरोध पर उस व्यक्ति ने पानी का लोटा दे दिया. लोटा पाते ही बच्चे का पिता जल्दी-जल्दी पानी पीने लगा. सभी लोग गुस्साये. उस व्यक्ति ने नजर नीची कर के लोटा बच्चे कि ओर बढा दिया.
एक यात्रा बैजनाथ धाम की हुई. यात्रा ठीक ठाक चल रही थी. बोतल वाले पानी का जमाना आ गया था कई बोतल पानी लेकर बैठा था. साथ में भी लोग थे. अब यात्रा पूरी होने वाली थी. सब लोग पानी पीकर अपना बोतल भी फेक चुके थे. अगले स्टेशन पर गाडी रुक गई. घंटे भर के बाद गला सूखने लगा. बगल वाले मित्र से पानी मांगा, उनके पास भी नहीं था. पानी वाले भी नहीं थे. हमारी बोगी प्लैट्फार्म से काफी दूर थी. किन्तु दूर एक स्टाफ क्वार्टर के सामने इन्डिया मार्क पम्प था दिखाई दिया. बगल वाले मित्र ने अपना और मेरा बोतल लेकर दौडकर पानी भरकर लाया.
लगभग दस साल पह्ले पहली जून को घर से दोपहर में बाजार चला गया मिठाई लेने. मन में आया कि एक रसगुल्ला खाकर पानी पीकर तब चलूं. त्भी मन में बात आई अरे दस मिनट में तो घर पहुंच ही जाऊंगा. घर तो पहुंच गया किन्तु आकर चारपाई पर लेट गया, पूरा शरीर जल रहा था. लू लग चुकी थी. पसीना बंद हो गया था. आज भी अधिक गर्मी होने पर पसीना बंद हो जाता है और शरीर में जलन होने लगती है.
अंग्रेज हमारे देश से चले गये किन्तु नेता और अधिकारी जनता को अभी भी मानव नहीं समझते और न उसे पूरा अधिकार देना चाहते हैं. अपने लिये जनता के धन से हर प्रकार की सुविधा लेते हैं किन्तु जनता को सामान्य सुविधा भी नहीं देते. अधिकारी, नेता और ठीकेदार के झगडे में प्लेटफार्म तथा ट्रेनों में चलने वाले लाइसेन्सी वेन्डर गायब हो चुके है. इन्हें ट्रेन के अनुसार लाइसेन्स देना चाहिये, इन्हें रेल की कमाई का हिस्सा भी नहीं बनाना चाहिये. पुलिस, टीटी आदि को इनसे धन उगाही और सामान की उगाही भी नहीं करनी चाहिये. बस इसपर ध्यान देना चाहिए कि गुणवत्ता वाली सामग्री मिले. शायद इस प्रकार की घटना फिर न घटे.
नमस्कार.
हालचाल गरम है.
राजनीति में हारे हुये राजद्लों के नेता जो सुपरनेता के चमत्कार से जीतने की सोच रहे थे अब हारने पर अपनी करनी पर कम नेता की करनी पर अधिक गुस्सा कर रहे हैं. इन दलों की हाल चाल गरम है.
मुझे गर्मी बहुत सताती है फिर भी प्रर्यावरण वालों की बात सोचकर रोज अखबार देखता हूं कि अब लिखा रहे कि गर्मी का नया रिकार्ड बना, लेकिन अभी तक नहीं दिखाई दिया.
पुराने मत से मृगशिर नक्षत्र चल रहा है. २३ जून तक दिन बडा होता चला जायेगा तो गर्मी अब नहीं पडेगी तो कब ? देवरिया मेम पुरवा चल रही है, लोकप्रचलित है कि पुरवा हवा भीतर से गर्म होती है. आठ बजे से ही पुरवा में बसी नमी भाप बन जाती है और गर्मी के साथ साथ हवा की कमी का अनुभव भी होने लगता है. प्यास बुझती ही नहीं, गर्मी में पानी की कमी एक स्ट्रोक के रूप प्राण भी ले लेती है.
अभी पानी की अनुपल्ब्धता के कारण एक खिलाडी की मौत से कुछ अतीत के जलकष्ट प्रकट हो गये. १९६२-६३ में जून में रात में गोरखपुर से लाररोड आना था. पहले तो टिकट पाना ही मुश्किल रहा. बाबूजी के एक परिचित जो वहीं कार्यरत थे टिकट दिलवा दिये. गाडी में बैठने के बाद मुझे प्यास लगी, अब ट्रेन चलने को थी. तब बगल में बैठे एक भोजपुरी के कवि ने अपना लोटा दिया और किसी ने लोटा भरकर पानी ला दिया. उन्होंने लोटा या गिलास लेकर ही यात्रा करने की सलाह भी दी.
एकबार इसी तरह के मौसम में इलाहाबाद की यात्रा में जा रहा था तब टू टियर वाले डिब्बे भी चलते थे, जिसमें ऊपर वाली बर्थ सोने के लिये तथा नीचेवाली बैठने के लिये होती थी. डिब्बे में बहुत भीड भी थी. किसी के पास लोटा था. उसने किसी प्रकार दूर नल से पानी मंगा लिया. पानी पी ही रहा था कि एक छोटा बच्चा पानी के लिये चिल्लाने लगा. लोगों के अनुरोध पर उस व्यक्ति ने पानी का लोटा दे दिया. लोटा पाते ही बच्चे का पिता जल्दी-जल्दी पानी पीने लगा. सभी लोग गुस्साये. उस व्यक्ति ने नजर नीची कर के लोटा बच्चे कि ओर बढा दिया.
एक यात्रा बैजनाथ धाम की हुई. यात्रा ठीक ठाक चल रही थी. बोतल वाले पानी का जमाना आ गया था कई बोतल पानी लेकर बैठा था. साथ में भी लोग थे. अब यात्रा पूरी होने वाली थी. सब लोग पानी पीकर अपना बोतल भी फेक चुके थे. अगले स्टेशन पर गाडी रुक गई. घंटे भर के बाद गला सूखने लगा. बगल वाले मित्र से पानी मांगा, उनके पास भी नहीं था. पानी वाले भी नहीं थे. हमारी बोगी प्लैट्फार्म से काफी दूर थी. किन्तु दूर एक स्टाफ क्वार्टर के सामने इन्डिया मार्क पम्प था दिखाई दिया. बगल वाले मित्र ने अपना और मेरा बोतल लेकर दौडकर पानी भरकर लाया.
लगभग दस साल पह्ले पहली जून को घर से दोपहर में बाजार चला गया मिठाई लेने. मन में आया कि एक रसगुल्ला खाकर पानी पीकर तब चलूं. त्भी मन में बात आई अरे दस मिनट में तो घर पहुंच ही जाऊंगा. घर तो पहुंच गया किन्तु आकर चारपाई पर लेट गया, पूरा शरीर जल रहा था. लू लग चुकी थी. पसीना बंद हो गया था. आज भी अधिक गर्मी होने पर पसीना बंद हो जाता है और शरीर में जलन होने लगती है.
अंग्रेज हमारे देश से चले गये किन्तु नेता और अधिकारी जनता को अभी भी मानव नहीं समझते और न उसे पूरा अधिकार देना चाहते हैं. अपने लिये जनता के धन से हर प्रकार की सुविधा लेते हैं किन्तु जनता को सामान्य सुविधा भी नहीं देते. अधिकारी, नेता और ठीकेदार के झगडे में प्लेटफार्म तथा ट्रेनों में चलने वाले लाइसेन्सी वेन्डर गायब हो चुके है. इन्हें ट्रेन के अनुसार लाइसेन्स देना चाहिये, इन्हें रेल की कमाई का हिस्सा भी नहीं बनाना चाहिये. पुलिस, टीटी आदि को इनसे धन उगाही और सामान की उगाही भी नहीं करनी चाहिये. बस इसपर ध्यान देना चाहिए कि गुणवत्ता वाली सामग्री मिले. शायद इस प्रकार की घटना फिर न घटे.
नमस्कार.