नमस्कार!
हालचाल ठीक है. भादों का महीना चल रहा है. वर्षा और बाढ़ के साथ कहीं कहीं सूखा भी पड़ा हुआ है. कल रेल विभाग ने कुछ फ्लेक्सी किराया का फार्मूला बनाया है. रेल विभाग कहता है कि उसे घाटा उठाना पड़ रहा है. पिछले तमाम वर्षों से रेल किराया में बजट के समय वृध्दि नहीं की जाती है और बाद में विविध तरीकों से पैसा उगाहा जाता है.
जेब कतरा, लुटेरा और भिखारी तीनों धन लेते हैं किन्तु तरीका भिन्न है .अर्थ व्यवस्था उदार हो रही है. अर्थ व्यवस्था को उदार बनाने के लिए सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ते हैं. इसलिए लूटने और ठगने और कालाबाजारी करने के उदारीकृत नाम खोजे गए हैं. इन्ही में से एक है फ्लेक्सी रेल टिकट.
प्रभु जी यदि रेल पैसा कमाना चाहती है तो प्रत्येक रूट पर नयी ट्रेन चलाये. इस ट्रेन का किराया मनमानी रखिये किन्तु सबके लिए एक रखिये. अधिकतम दस दिन पहले टिकट दीजिये. रेल किराया प्रति किमी की दर से लीजिये और फ्लेक्सी किराया काऔसत निकाल कर सबको एक समान दर पर टिकट दीजिये. ट्रेन के आधे डिब्बे स्लीपर और आधे चेयर कार वाले रखिये. परिचालन व्यय से कम का तो सवाल ही नहीं कम से कम पचास प्रतिशत लाभ पर चलाइये. जैसे जैसे मांग बढ़े वैसे वैसे ट्रेनों की संख्या बढ़ाइए. अगले बजट में जनता को साफ़ साफ़ खर्चा बताकर यात्री किराया किमी की दर पर कीजिये.
भारत की जनता भारतीय रेल को स्वच्छ , सुन्दर और आधुनिक देखना चाहती है इसलिए कुछ दिन के लिए बुलेट ट्रेन पर पैसा खपाने का काम रोककर एक सौ बीस करोड़ जनता के लिए काम कीजिये . पांच करोड़ मलाई दार जनता के लिए बाकी जनता को पीसना बंद कीजिये. संगठित पाकेटमारी बंद होनी चाहिए. रेल और मोबाइल दोनों ही इस काम में जुटे हैं.
नमस्कार
फिर भेंट होगी.
हालचाल ठीक है. भादों का महीना चल रहा है. वर्षा और बाढ़ के साथ कहीं कहीं सूखा भी पड़ा हुआ है. कल रेल विभाग ने कुछ फ्लेक्सी किराया का फार्मूला बनाया है. रेल विभाग कहता है कि उसे घाटा उठाना पड़ रहा है. पिछले तमाम वर्षों से रेल किराया में बजट के समय वृध्दि नहीं की जाती है और बाद में विविध तरीकों से पैसा उगाहा जाता है.
जेब कतरा, लुटेरा और भिखारी तीनों धन लेते हैं किन्तु तरीका भिन्न है .अर्थ व्यवस्था उदार हो रही है. अर्थ व्यवस्था को उदार बनाने के लिए सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ते हैं. इसलिए लूटने और ठगने और कालाबाजारी करने के उदारीकृत नाम खोजे गए हैं. इन्ही में से एक है फ्लेक्सी रेल टिकट.
प्रभु जी यदि रेल पैसा कमाना चाहती है तो प्रत्येक रूट पर नयी ट्रेन चलाये. इस ट्रेन का किराया मनमानी रखिये किन्तु सबके लिए एक रखिये. अधिकतम दस दिन पहले टिकट दीजिये. रेल किराया प्रति किमी की दर से लीजिये और फ्लेक्सी किराया काऔसत निकाल कर सबको एक समान दर पर टिकट दीजिये. ट्रेन के आधे डिब्बे स्लीपर और आधे चेयर कार वाले रखिये. परिचालन व्यय से कम का तो सवाल ही नहीं कम से कम पचास प्रतिशत लाभ पर चलाइये. जैसे जैसे मांग बढ़े वैसे वैसे ट्रेनों की संख्या बढ़ाइए. अगले बजट में जनता को साफ़ साफ़ खर्चा बताकर यात्री किराया किमी की दर पर कीजिये.
भारत की जनता भारतीय रेल को स्वच्छ , सुन्दर और आधुनिक देखना चाहती है इसलिए कुछ दिन के लिए बुलेट ट्रेन पर पैसा खपाने का काम रोककर एक सौ बीस करोड़ जनता के लिए काम कीजिये . पांच करोड़ मलाई दार जनता के लिए बाकी जनता को पीसना बंद कीजिये. संगठित पाकेटमारी बंद होनी चाहिए. रेल और मोबाइल दोनों ही इस काम में जुटे हैं.
नमस्कार
फिर भेंट होगी.