विश्व महिला दिवस
नमस्कार!
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है.इसे विश्व महिला दिवस क्यों नहीं कहते हैं? इसकी राजनीति क्या है? विश्व की सभी महिलाओं को सामान अधिकार मिले समान प्रतिष्ठा मिले. इसके लिए जो भी संघर्ष कर रहे हैं उन सभी को प्रणाम. भारत के पंचायती राज की व्यवस्था में आरक्षण के सहारे ही सही वे आगे आरहीं हैं . यही राजनैतिक दल अपने संगठन और विधायिका में आरक्षण देने को तैयार नहीं हैं. यहाँ तक की वामपंथी दलों की कार्यकारिणी में में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व आधा नही है. उस दल में भी नही है जो कहते हैं की जहां नारियों की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते हैं. उन दलों में भी नही है जो नारी को दलित मानते हैं.
क्रांतिकारी मीडिया के विज्ञापनों पर कलम वाली तलवार वाले भी कुछ नहीं कहते हैं. माइक बम वाले भी कुछ नही कहते हैं. मीडिया के सहारे नारी को जिस फैशन की अंधी गली में धकेलने की कोशिश होरही है. महिलाएं उसे समझें आज के दिन यही कामना है.
कलाके हर विधा के लोग महिलाओं की प्रतिष्ठा बढाने का ही प्रयास करेंगे. आशा की जा सकती है. नेट संसार भी समान अधिकार और प्रतिष्ठा के लिए सतत सचेष्ट रहेगा. साभिवादन.
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