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Monday, October 3, 2011

गरीबी रेखा

नमस्कार !

क्या हालचाल है ?

अमीरी की रेखा का ज्ञान भारत को परेशान कर रहा है. महान भारत के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री अहलुवालिया जी ने तमाम लोगों को रातोंरात अमीर बना दिया. बहुत दिनों से मैं भी गरीबी रेखा की खोज में था मिल ही नहीं रही थी. कई लोग और कई सस्थाएं इस रेखा को जहां तहां खीच रहे थे. शुक्र है माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने योजना आयोग से रेखा की मांग कर दी. योजना आयोग की रेखा को देखकर, मध्यवर्ग जो विद्वान दीखने के लिए अखबार पढता है और टीवी पर समाचार पढ़ता है, बौखला गया. उसके पैर के नीचे की जमीन खिसक गयी. वह अपने को अमीर समझता था. अब फिर रिक्सावाला उसके स्टेटस में आ गया. अब घड़ी, साइकिल,टीवी, मोबाइल और गैस जो कभी उसने अपनी अमीरी दिखाने के लिए लिए थे  निरर्थक हो गए. भारत अब अमीर देश हो गया. मध्यवर्ग अचानक बौखला गया और योजना आयोग पर हल्ला बोल दिया.

योजना आयोग के कर्ता धर्ता अहलुवालिया जी विदेश से लौटे   महान भारत के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री से मिले और महान आईआईटीएन मंत्री माननीय जैराम रमेश जी के साथ प्रेसवार्ता  कर बताया कि लोग गलत कह रहे हैं . बत्तीस रूपये रोज पर बौखलाइये मत. लोगों को गणित ही नहीं आती. एक परिवार में पाँच लोग माने जाते हैं. बत्तीस में पाँच क गुणा कीजिए तो होगा एक सौ साठ.  एक दिन में एक सौ साठ, महीने में तीस दिन तो हो गए तो महीनें में हो गया चा.....र....ह....जा.....र....आठ....सौ...... अब बताइये महीने में चार हजार आठ सौ आमदनी वाला परिवार गरीब कैसे हुआ? जबसे मैनें उनका वक्तव्य सुना  है तब से जोड़ रहा हूँ. साल में तो ३६५ या ३६६ दिन होते हैं. ४८०० में १२ से गुणा करने पर आ रहा है ५७६०० . और ५७६०० में ३६५ से भाग देने पर आ रहा है १५७.८० . फिर १५७.८० में ५ से भाग देने पर आ रहा है ३१.५६  तो इस प्रकार तीन साल के लिए गरीबी रेखा ३१.५६ दिन ही हुई. ३६६ वाले साल में फिर गणित गडबड हो जा रहा है. तो भाई मेरे समझ के बाहर के इस गणित को समझाइये.

इतना ही नहीं जब हर तीन महीने में औद्योगिक महगाई सूचकांक बदल जाता है, हर छह महीने में सरकारी कर्मचारियों का सूचकांक बदल जाता है तो गरीबी रेखा भी ऊपर उठेगी या अगले दस सालों के लिए स्थिर  रहेगी . क्योंकि अहलुवालिया जी ने कहा कि हमने तो रेखा को बदला है वो भी तेंदुलकर जी की राय पर.  फिर कोई कमेटी बनेगी और रेखा बनाएगी तब तक तो यही रेखा रहेगी यही नियम चला आ रहा है.

जयराम जी बोले कि जाति गणना के साथ ग़रीबों की भी गणना हो जायेगी तब पुनः रेखा खींची जायगी. अब इस समय जो गणना हो रही है वह तो पुराने फार्मूले पर ही चल रही है. फिलहाल हल्ला गुल्ला बंद हो जाय. बाक़ी बाद में  रेखा खींचना तो मंत्रालय को ही है खीच दी जायगी.

मेरे समझ आ रहा कि जब हमलोग ग्लोबल गाँव में ही रह रहें हैं तो  एक गाँव में गरीबी रेखा तो एक ही होनी चाहिए. मुहल्लेवार अलग अलग तो नहीं होनी चाहिए .

फिर मिलेंगें.
नमस्कार.