सचिन और भारत में खेल
नमस्कार !
का हो का हालचाल बा ? ठीक बा नू ?
आज के सब अखबार आ टीवी में सचिन छवले बाने। वैसे "मीडिया" (आजकाल ईहे न कहाता) में राजनीति की बाद खेले के नंबर ह। ओकरी बाद नंबर आवेला अपराध के। हँ त सचिन के बात करत रहनी हँ । सचहूँ के सचिन के कौनो जोड़ नईखे। उनुके जेतना तारीफ कईल जा ऊ कम बा। ख़ास बात ईहो रहल ह की ऊनुकी गुरू रमाकांत अचरेकर ( द्रोणाचार्य पुरस्कार ) के तारीफ भी कईल गईल ह।
आज की अखबार में ईहो चर्चा रहल ह की प्राइमरी विद्यालय के लइकन में होखे वाला मधुमेह के कारण ई बा कि उन्हन की इस्कूलन में खेले के जगहिए नईखे। ई बहुत दुःख के बात बा। ऐ घरी के केन्द्र के शिक्षामंत्री कपिल सिब्बल भाई कुछु नया करे खातिर बहुत अकुताइल बाने। का ऊ ई क सकेले कि सगरी देश के प्राईमरी इस्कूलन में सगरी लईकन के ठीकठाक कमरा में बईठे के जगह आ हर कक्षा के अलग अलग मास्टर के इंतजाम हो जाऊ। साथे साथे इस्कुलवन में लइकन के खेलेके जागाही मिले खेल सिखावे वाला मास्टर होखें। खेल तन आ मन दूनू के सेहत ठीक राखेला। खेल बहुत जरूरी ह। देश के खेल मंत्रालय अगर देश की कुल्ही लइकन के खेले के व्यवस्था न क सकेला त का करी खाली एही झगरा में परल रही लोग कि ई प्रान्त के काम ह कि केन्द्र के।
खेल के सितारा सचिन बनल रहे। साथे साथे ऐ देश के सगरी लईकन के खेले के जगह मिलो। ईहे कामना बा।
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Sunday, November 15, 2009
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