Friday, February 12, 2010

शिव एवं गण


नमस्कार

हालचाल ठीक है
आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। आज महाशिवरात्रि है। हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। पुराण कथाओं के अनुसार आज के दिन शिव का विवाह हुआ। आज के दिन शिव जी प्रसन्न रहते हैं। आशुतोष भगवान शिव के भक्तों के लिए भी प्रसन्नता का विषय है। स्नान भारतीय पर्वों का सबसे महान कार्य है। इसलिए भक्तगण पवित्र नदियों, सरोवरों कूपों में स्नान करने को आतुर रहते हैं। भक्त गण आपस में प्रतियोगी भी हो जाते हैं। इस प्रतियोगिता में कुछ अप्रिय भी हो जाया करता है।

इस वर्ष हरिद्वार में कुम्भ स्नान का वर्ष है। आज वहां पर प्रथम शाही स्नान हुआ। साधु संतों का शाही स्नान नाम सुनकर कुछ अटपटा लगता है। स्नान का सबसे बड़ा पुण्य स्थल हरिद्वार में ब्रह्म कुण्ड है। इस स्थान पर शाही स्नान के लिए साधु समाज में भी प्रतियोगिता होती है। प्रशासन को नाकों चना चबा लेना पड़ता है। आज यहाँ स्नान जूना अखांड़े के संतो साधुओं नागाओं के स्नान से प्रारम्भ हुआ। वहां उपस्थित लोगों ने भी देखा दूसरों ने दूरदर्शन की कृपा से देखा ।

दूर से देखने पर कभी लगता है की ये क्या हो रहा है भाई? लेकिन मानव के जीवन में इस तरह के अनुभव भी बड़े काम के लगते हैं। अगर शरीर साथ दे तो इस प्रकार के अनुभव बड़े काम के होते हैं। धर्म का अफीम भी कभी कभी बड़ा लाभ करता है।

आज भारत में जनतंत्र की एक झूठी परीक्षा का दिन भी रहा। पूरे महाराष्ट्र की सरकार, केंद्र सरकार विशेष कर कांग्रेस आज मुम्बई में अभिनेता शाहरुख खान की फिल्म माय नेम इज खान के प्रथम प्रदर्शन के लिए परेशान रहे। भारतीय जनतंत्र की एक अनोखी राजनैतिक पार्टी शिवसेना अपना बल दिखाती रही। मीडिया वाले आज दिन भर लोकतंत्र की जीत हार कराते रहे।

जनतंत्र हर ओर से हारता रहा। राजनैतिक दल व नेता जीतते रहे, आदमी हारता रहा। पत्रकार भी जीत गए। फिल्म भी जीत गयी। हीरो का दाम बढ़ गया। शरद पवार की पार्टी और शिवसेना का तालमेल थोड़ा बढ़ गया ।
हाथ मलते मलते राज ठाकरे भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा लिए तथा कांग्रेस को बता दिए की हाथ मिलाये रहो।

नमस्कार।

Tuesday, February 9, 2010

बीते दिन

बीते दिन
नमस्कार
हालचाल ठीक है न!

इस समय मैं अपने जीवन के सत्तावनवें वर्ष के अंतिम घंटे को जी रहा हूँ । नव फरवरी बीत रही है दस फरवरी का इन्तजार है। एक बढिया गुजरा वर्ष । खुशियों भरा वर्ष। एक सपने के पूरे होने का वर्ष। एक सपने के टूटने का वर्ष।
बेटी प्रियंका की शादी का वर्ष। लोकेश के भारतीय प्रशासनिक सेवा के चौथे असफल होने का वर्ष। सपने टूटते रहते हैं। नयी आशाएं बनती /बंधती रहती हैं। यही तो जिन्दगी है। यह मेरे ब्लॉग के शुरू होने का वर्ष है। अभी तक तो शायद ही कोई पाठक है। कुछ लिखकर सार्वजनिक तो हो रहा है। अपनी इक्षा तो पूरी होही जाती है। ब्लॉग की यही तो खूबी है।

कभी कभी मन में प्रश्न उठता है ब्लॉग की भी हिन्दी होनी चाहिए। अभी तो हिंदी लिखने के लिए रोमन का सहारा ले रहा हूँ। हिंदी के लिए ही समस्या क्यों होती है। अभी भी रेमिंगटन और रोमन में समस्या हो जाती है। इनस्क्रिप्ट जानने की कोशिश में हूँ अभी तक सफलता नही मिली है।

रोज के विचार लिखित रूप में नहीं आ पा रहें हैं। शायद आगे हो सकेंगे। फिलहाल इस समय वर्षा होरही है।

नमस्कार