Tuesday, February 9, 2010

बीते दिन

बीते दिन
नमस्कार
हालचाल ठीक है न!

इस समय मैं अपने जीवन के सत्तावनवें वर्ष के अंतिम घंटे को जी रहा हूँ । नव फरवरी बीत रही है दस फरवरी का इन्तजार है। एक बढिया गुजरा वर्ष । खुशियों भरा वर्ष। एक सपने के पूरे होने का वर्ष। एक सपने के टूटने का वर्ष।
बेटी प्रियंका की शादी का वर्ष। लोकेश के भारतीय प्रशासनिक सेवा के चौथे असफल होने का वर्ष। सपने टूटते रहते हैं। नयी आशाएं बनती /बंधती रहती हैं। यही तो जिन्दगी है। यह मेरे ब्लॉग के शुरू होने का वर्ष है। अभी तक तो शायद ही कोई पाठक है। कुछ लिखकर सार्वजनिक तो हो रहा है। अपनी इक्षा तो पूरी होही जाती है। ब्लॉग की यही तो खूबी है।

कभी कभी मन में प्रश्न उठता है ब्लॉग की भी हिन्दी होनी चाहिए। अभी तो हिंदी लिखने के लिए रोमन का सहारा ले रहा हूँ। हिंदी के लिए ही समस्या क्यों होती है। अभी भी रेमिंगटन और रोमन में समस्या हो जाती है। इनस्क्रिप्ट जानने की कोशिश में हूँ अभी तक सफलता नही मिली है।

रोज के विचार लिखित रूप में नहीं आ पा रहें हैं। शायद आगे हो सकेंगे। फिलहाल इस समय वर्षा होरही है।

नमस्कार

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