चर्चा में
नमस्कार! हालचाल ठीक है ?
संसद ठप है. भ्रष्टाचार पर तू तू मैं मैं चल रही है. खुशवंत बुढ़ापे में पछता रहे हैं कि कुछ पैसा नही बना पाए. मीडिया में भी तू तू मैं मैं. कार्यपालिका में महाभ्रष्ट कौन है? कितने प्रतिशत हैं ? न्यायपालिका की खबर अखबार से लेकर आम आदमी तक चर्चेमें है. बचा कौन है . जिसके जिम्मे अंकुश है वही संलिप्त है. बचा आम आदमी सारा दोष उसी का है.
कभी किसी कक्षा की संस्कृत की पुस्तक में चतुर चोर की कहानी पढी थी. चोर को राज महल में चरी करते स्वयं महाराज ने पकड़ा और मृत्युदंड दे दिया. दंड के ठीक पहले चोर ने कहा कि महाराज को बुलाया जाय उसे एक अति महत्वपूर्ण बात कहनी है. महाराज के आने पर उसने कहा कि वह सोने की खेती करना जानता है और इस राज्य की उन्नति के लिए मरने के पहले खेती करके राज्य को सोना समर्पित करना चाहता है. राजा ने उसके दंड को सोने की खेती होने तक स्थगित कर दिया.
चोर ने बहुत चुनाव के बाद एक जमीन के टुकड़े को लिया और उसमें टागुन नामक फसल बो दिया. टागुन अगस्त सितम्बर के महीने पकती है दाने सुनहले होते हैं बाली गोल होती है तथा आधे पर से लटक जाती है रात की ओस की बूँदें उसपर चिपकी रहती हैं सूर्योदय के समय पूरब दिशा में खड़े होकर देखने से लगता है कि सोने की फसल है. फसल पकाने पर चोर ने कहा कि इसे वही काट सकता है जिसने कभी भी चोरी न की हो. कोई भी ऐसा नहीं मिला जिसने चोरी न किया हो यहाँ तक कि महाराजा भी. तब चोर ने कहा कि जब सभी चोर हैं तो उसे ही दंड क्यों ? राजा ने चोर की चतुराई देखकर उसे मंत्री बना दिया.
सिफारिश करना भ्रष्टाचार नहीं है. पैसे लेकर सिफारिश करना भ्रष्टाचार है. लेकिन सिफारिश से उपकार के साथ ही नियम के साथ भ्रष्टाचार होजाता है. शुकराना हो नजराना हो या जबराना हो सभी भ्रष्टाचार हैं. बस बात इसपर है कि आप का वास्तविक झुकाव किस तरफ है.
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