Thursday, May 23, 2013

रिपोर्ट कार्ड

नमस्कार
हालचाल ठीक है. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी भारत निर्माण कर रहे हैं. ्यह निर्माण उन्हें और कान्ग्रेसियों को ही दिखाई दे रहा है. इस समय कोई भी दल नहीं है जिसमें आन्तरिक लोकतन्त्र हो. सभी हर प्रकार से सामन्तवादी हैं. ये सारा दोष जनता पर थोप देने के लिये तैयार बैठे हैं.१९१४ में लोकसभा का आम चुनाव है. सभी दल अपनी सीट बढाने के तिकडमी कार्यक्रम पर जुटे हुये हैं . इस समय कान्ग्रेस चार वर्ष पूरे करने का समारोह कर रही है. मैं भी सोच रहा हूं कि इस सरकार ने भारत को और मुझे ऐसा क्या दिया है जिसके लिये इसकी सराहना करूं या उलाहना दूं.

अब भारत सरकार छ्ब्बीस जनवरी को राष्ट्र की प्रगति का लेखाजोखा न देकर सरकार के गठन के दिन को रिपोर्ट कार्ड का दिन मानती है और अपने को टापर बना देती है.नौ वर्षों से सोनिया और मनमोहन को छोडकर सभी अस्थिर रहे हैं. इन दोनों की प्रत्येक  गलती क्षम्य है.

राष्ट्रीय स्तर तथा अन्तर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर भ्रष्टाचार में प्रथम  स्थान दिया जा सकता है.
शासन के सन्चालन में बस पास भर किया जा सकता है.
मौन और धैर्य के लिये प्रथम स्थान दिया जा सकता है.
केवल भाजपा वाले मनमोहन जी को ईमानदार कहते रहे हैं क्योकि ये सदा से पूंजीपतियों के पक्षधर रहे हैं किन्तु अब वे भी बेईमान कहने लगे हैं. अतः बेईमानी में प्रथम श्रेणी प्रदान किया जा सकता है.
देश के भ्रष्टों को मनमोहन जी के कारण राहत, सूझ, और सहनशक्ति मिलती है अतः इन्हे माडल भ्रष्ट कहा जा सकता है.

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