Friday, August 9, 2013

हमारी शिक्षा -१

नमस्कार!
हालचाल ठीक है.

शिक्षा किसी के चुनाव के घोषणा-पत्र का प्रमुख अंग नही बन पाता. सबको शिक्षा किन्तु कैसी शिक्षा? प्रत्येक वर्ग के अभिजन समुदाय के बच्चे अच्छे स्कूल में पढ सकें इसकी  व्यवस्था शिक्षा के अधिकार कानून में कर दी गयी है.

प्राथमिक शिक्षा की चिन्ता छोडकर अब केवल मिड डे मील की बात चलती है. ग्राम पंचायत के सभापति को छोडकर अन्य सदस्य तथा अभिभावक के चुने हुये सदस्यों को एक एक माह मिड डे मील की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जानी चाहिये. अभिभावकों में से ही निरीक्षक भी रखे जाने चाहिये शिक्षकों को इससे पूर्णतः मुक्त कर दिया जाना चाहिये.

छात्र-शिक्षक अनुपात को २५  ः १ करना चाहिये, प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में कम से कम छ्ह कमरे कक्षा के लिये, इसके अतिरिक्त अध्यापक कक्ष, भंडार कक्ष, रसोईघर, पर्याप्त संख्या में शौचालय होने चाहिये. विद्यालय की सफाई की व्यवस्था होनी चाहिये. स्वतंत्रता के पूर्व मिट्टी के बने भवनों मे कमरों की संख्या अधिक होती थी. किन्तु बाद में तीन कमरों के भवन बनने लगे. उसके बाद छोटे छोटे कबूतरखानें जैसे  कमरे बनाने की भरमार हो गई.

प्राथमिक शिक्षकों से जो भी अतिरिक्त कार्य लिये जाते हैं उन्हें ग्रीष्मावकाश में समुचित मानदेय देकर कराना चाहिये.

अंग्रेजी की पढाई की व्यवस्था अब सभी स्कूलों मे कर दी जानी चाहिये किन्तु पढाई का माध्यम मातृभाषा ही होना चाहिये. हाई स्कूल तक भाषा की पढाई मौखिक और लिखित दोनों स्तरो पर होनी हिये. सुलेख, श्रुतिलेख,सुपठन अनिवार्य किया जाना चाहिये.

हमारे माननीय गण विकास की बात करते हैं, वेतन भत्ता और पेंशन लेते हैं पैसा बांटने के लिये लोगों की लाइन लगवाते हैं किन्तु हर प्रकार के दायित्व से मुक्त रहते  हैं. उनके क्षेत्र के छात्र पिछडे क्यों इसका उत्तर भी उनसे पूछा जाना चाहिये. जिस प्रकार प्रश्नकाल होता है उसी प्रकार प्रतिवेदन काल भी होना चाहिये जिसमें हर माननीय अपने क्षेत्र की जानकारी दे सके. इस प्रतिवेदन में प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा  तक होनी  चाहिये. जहां तक शिक्षा के अधिकार के दायरे  को बढाया जाय वहां तक जबाबदेही भी बढनी चाहिये.

यदि हम चाहते हैं कि उच्च शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण हो तो हमें प्राथमिक स्तर से लेकर हर स्तर पर सुधार करना होगा. प्रत्येक स्तर पर मानव संसाधन और भौतिक संसाधन दोनों का अति अभाव है.

अतः हम सभी को आगामी चुनाव में दबाव बनाना ही होगा कि केजी से पीजी तक अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निःशुल्क एवं सबके लिये सुलभ शिक्षा की व्यवस्था होनी ही चाहिये.

फिर मिलेंगे
नमस्कार!

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