Wednesday, August 14, 2013

१४ अगस्त २०१३

१४ अगस्त २०१३

नमस्कार!

हालचाल ठीक है. कल "पन्द्रह अगस्त" है. भारत की जनता के लिये एक महत्वपूर्ण दिन. पुराण कथा में जिस प्रकार गंगा जी भगीरथ के अथक तपस्या से  स्वर्ग से अवतरित हुई. उसी प्रकार जनता की प्रसन्नता का दिवस है. गंगा जी शिव की जटा में उलझ गई. भगीरथ पुनः तपस्या में जुटे तब गंगा जी पृथ्वी पर आकर भगीरथ के पीछे-पीछे गंगासागर तक जाकर समुद्र में मिलीं.

भारत के लोग पन्द्रह अगस्त १९४७ के बाद अपनी तपस्या छोड दिये और हमारी स्वतंत्रता तमाम विचारधाराओं  के बहाने कुछ लोगों के हाथों में चली गई. उन्होनें अपनी सुविधानुसार संविधान बनाया. अब उसकी मनमानी व्याख्या करते हैं, अपने लिये संशोधन भी कर लेते है.

जनता मुंह ताकती रह जाती है. वे संविधान को सर्वोपरि नहीं मानते. संसद को भी नहीं मानते. अपने को मानते हैं. किन्तु इन सभी की आत्मा कुछ घरानों और व्यक्तियों में सिमट गयी है.

उनके वक्तव्य आम जनता को सुनने पड्ते हैं, झूठ लगने पर भी मानने पडते हैं. अपनी आवश्यकताओं के लिये इन पर निर्भर होना पडता है. इसलिये ये जनता को तमाम खेमों में बांट चुके हैं. लोग आपस में दंगा करने पर उतारू हैं. बहुत होता है तो इनमें से कुछ को गाली देकर जनता अपनी भडास भी निकाल लेती है.

आशा करें कि हम अपने मतभेदों को भुलाकर पुनः एक साथ तपस्या करेंगे और हमारी स्वतंत्रता निर्मल धारा के रूप में बहने लगेगी. हम पुनः अपनी आजादी को उल्लास के साथ आत्मसात कर सकेंगे.

जय जनता! जय जगत!!

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