Tuesday, August 27, 2013

नमस्कार!
हालचाल ठीक है,
खाद्य सुरक्षा बिल और उसकी आवश्यकता पर बडे बडे माननीय, अर्थशास्त्री, चिन्तक, सिविल सोसाइटी के लोग अपनी बात कह चुके. बिल लोक सभा से पास हो गया. राज्यसभा से पास हो जायेगा. कानून भी बन जायेगा. यह भारत के सभी नागरिकों के लिये हो जाता तो क्या बुरा हो जाता. कालाबाजारी बन्द हो जाती. इससे सम्बन्धित भ्रष्टाचार बन्द हो जाता.

प्रत्येक व्यक्ति के लिये खाने भर का गेंहू और चावल एक भाव से पूरे देश में मिल जाय तो अर्थव्यवस्था बिल्कुल  नहीं हिलेगी. किसान से लाभकारी मूल्य पर केन्द्र सरकार जितना किसान बेंचना चाहे उतना खरीद ले हर विकास खण्ड पर अत्याधुनिक सेलो बनाकर सुरक्षित कर ले. उसे साफ करके गुणवत्ता के मानकों को नियत कर सभी के लिये खाने भर का गेंहू और चावल उपलब्ध करा दे.

अर्थशास्त्री जी बोलेंगे कि पैसा कहां से आयेगा? ७०% आबादी के लिये जहां से आयेगा वहीं से सबके लिये आयेगा. श्रीमान अर्थशास्त्री जी भारत की जनसंख्या की आमदनी को चाहे जितने वर्गों बांटिये लेकिन कुछ सातत्य तो रहेगा. हमारे संविधान में समाजवाद  जोडा गया है उसका  उपयोग , भोजन, वस्त्र, शिक्षा और चिकित्सा में होना चाहिये.

राम जी को वर्ष में तीन लाख वेतन मिलता है, वर्ष भर में पचास हजार जीपीयफ.बीमा आदि धारा ८० का लाभ ले लेते हैं. उनको पांच हजार टैक्स भी दे देना पडता है, घर में उनको छोडकर पांच अन्य सदस्य हैं. इस प्रकार उन्हे प्रति व्यक्ति लगभग तीन हजार प्रति माह खर्च के लिये मिल जाता है. इतनी ही आमदनी वाले श्याम जी के घर कुल तीन प्राणी हैं. उन्हें छह हजार प्रति व्यक्ति मिल जाता है. परनामी जी भी साल भर में तीन लाख कमा लेते हैं किन्तु वे यह कमाई ठेले से करते हैं. वह बीपीयल कार्ड धारक हैं .चरनामी जी तीनलाख वेतन से और तीन लाख ऊपर से कमा लेते हैं. वह एक लाख की बचत दिखाकर आय्कर से भी बच जाते है. इसप्रकार नाना प्रकार के लोग हैं, इन्हें आयकरदाता वर्ग, मध्यवर्ग और गरीबी रेखा के नीचे के वर्ग में बांट्कर केवल वोट का जुगाड किया जा रहा है.

बन्धुओं, आप सभी लोग, सबके लिये एक भाव पर अन्न, के.जी. से पीजी तक एक समान सबको शिक्षा तथा सबके लिये एक समान चिकित्सा सुविधा की मांग कीजिये चाहे आप जिस दल को पसन्द करते हों.
ध्न्यवाद.

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