तीस्ता सीतलवाड़
नमस्कार!
हालचाल ठीक है. इस क्षेत्र में सूखा अधिक और वर्षा कम है. तिलहन इस समय कम बोया जाता है . तिल और अरहर दोनों को नीलगाय पसंद करते हैं. ये जंगली जीव अबध्य हैं. अत: मोदी जी के मन की बात अच्छी कैसे लगाती. मोदी जी की बात तीस्ता को भी अच्छी नहीं लगती है. अत: उनकी जांच सीबीआई कर रही है. लोग कहते हैं कि इसी सीबीआइ की जांच के लिए धरना प्रदर्शन और कोर्ट कचहरी सब होता है तो तीस्ता की जांच से लोग क्यों परेशान हैं?
आज के जनसत्ता नामक अखबार में "अपूर्वानंद " का एक लेख पढ़ा तो तीस्ता के कार्य का महत्व प्रकट हुआ. फिर २४ जुलाई के इन्डियन एक्सप्रेस के लखनऊ संसकरण में "जूलियो रिबेरियो" का लेख "साइलेंसिंग तीस्ता" पढ़ा. ( देवरिया में यह अखबार दो दिन बाद आता है )
अपनी स्वतंत्रता और निर्भयता पर हरदम प्रश्न उठता रहता है. भारत में कितना लोकतंत्र है यह भी दिखाई देता रहता है. तमाम ऐसे लोग जो सत्ता से टकराते हैं उनका हाल भी दिखाई देता रहता है. भारत के राजदल जब लोकतंत्र की हत्या रोज ही करते हैं. फिर भी भारत को सबसे बड़ा लोकतंत्र ( सबसे अच्छा नहीं ) कहते रहते है. ऎसी स्थिति में तीस्ता की जांच और जेल दोनों ही अवश्यम्भावी हैं. चाटुकार यनजीओ जय हो में लग गए हैं.
भारत में प्रत्येक प्रदेश में पुलिस के कार्य में राजदल पूरा पूरा हस्तक्षेप करते हैं. यह भी कहते रहते हैं कि कानून अपना काम करेगा. पुलिस, प्रशासन व् सत्ताधारी राजदल के सम्बन्ध जनता खूब जानती है. किन्तु एक क्षीण आशा सीबीआइ से बन जाती है. अब तक के अधिकाधिक प्रकरणों में संदेह ही बढ़ा है.
भारत में एक अंतर-राज्यीय पुलिस व खुफिया पुलिस की आवश्यकता है, जिसका गठन और परिचालन राज्यों के मुख्यासचिवों के एक पैनल के द्वारा किया जाना चाहिए.एक समय में पांच राज्यों के लाटरी से चुने गए मुख्यासचिवों को रखा जाना चाहिए.
देश के सेवानिवृत्त लोकसेवक, पुलिससेवक, और न्यायसेवक मिलकर तीस्ता और तीस्ता जैसे लोगों की न्याय की लाड़ाई में सम्मिलित हो जाय तो तीस्ता और एनी जागरूक नागरिकों को न्याय मिल सकेगा.
नमस्कार.
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