Thursday, November 12, 2009

तूफान

नमस्कार !
क्या हालचाल है ?

कल देश एक खतरनाक तूफान से बच गयालेकिन जो बवंडर लगातार देश में बरबादी मचाये हुवे है उससे कैसे बंचेकोई कहेगा "अन्धकार को क्यों कोसे हम आओ अपना दीप जलाएं "। जब हम अंधेरे में चलते हैं तो राह भी खोजते हैं और कहते भी हैं कि बड़ा अँधेरा हैलाख भ्रस्ताचारियों में से एक के पकड़े जाने पर मीडिया और लोग दोनों के लिए वादविवाद का अच्छा अवसर हाथ लग जाता हैयह भी ध्यान देने वाली बात है कि हमारे देश के जिम्मेदार सरकारी नेता जो विभाग सम्हाले हुए हैं वो क्या करते रहते हैंवे खिलाड़ी हैं, दर्शक हैं, सहयोगी हैं अथवा और कुछकुछ दिनों तक चर्चा चलेगी फिर वही ढाक के तीन पातगलती तो हर मनुष्य से होती हैकुछ सीमा तक हम गलतियों की अनदेखी भी करते हैंवह सीमा क्या हो यह असीमित समय तक चलने वाले वादविवाद का विषय हो सकता हैदेश में कानून का राज्य है यह प्रर्दशित होता रहे इसके लिए तो राजनेता तत्पर हैं अधिकारी ही नागरिकहम जिसे भी सरकार कहें उसकी जिम्मेदारी सबसे अधिक हैइसी लिए ही सरकार बनाई जाती है



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