क्या हालचाल है ?
कल देश एक खतरनाक तूफान से बच गया। लेकिन जो बवंडर लगातार देश में बरबादी मचाये हुवे है उससे कैसे बंचे। कोई कहेगा "अन्धकार को क्यों कोसे हम आओ अपना दीप जलाएं "। जब हम अंधेरे में चलते हैं तो राह भी खोजते हैं और कहते भी हैं कि बड़ा अँधेरा है। लाख भ्रस्ताचारियों में से एक के पकड़े जाने पर मीडिया और लोग दोनों के लिए वादविवाद का अच्छा अवसर हाथ लग जाता है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि हमारे देश के जिम्मेदार सरकारी नेता जो विभाग सम्हाले हुए हैं वो क्या करते रहते हैं। वे खिलाड़ी हैं, दर्शक हैं, सहयोगी हैं अथवा और कुछ। कुछ दिनों तक चर्चा चलेगी फिर वही ढाक के तीन पात। गलती तो हर मनुष्य से होती है। कुछ सीमा तक हम गलतियों की अनदेखी भी करते हैं। वह सीमा क्या हो यह असीमित समय तक चलने वाले वादविवाद का विषय हो सकता है। देश में कानून का राज्य है यह प्रर्दशित होता रहे इसके लिए न तो राजनेता तत्पर हैं न अधिकारी न ही नागरिक। हम जिसे भी सरकार कहें उसकी जिम्मेदारी सबसे अधिक है। इसी लिए ही सरकार बनाई जाती है।
No comments:
Post a Comment