शिक्षा की परीक्षा
नमस्कार !हालचाल ठीक है?
शिक्षा सबको मिले, कहाँ मिले, कैसे मिले, किसके द्वारा मिले। इसकी चर्चा छोड़कर केवल परीक्षा की चर्चा होती रहती है। जबसे शिक्षा की गुड़वत्ता बढ़ाने का प्रयास किया जाने लगा है शिक्षा समाप्त होने लगी है तथा शिक्षकों की नियुक्ति में सुबिधा शुल्क के चर्चे बढ़ने लगे हैं।वास्तविक स्थिति का ज्ञान न है न हो सकता है। शिक्षा बिना परीक्षा के नहीं हो सकती है, आपने क्या जाना इसे कैसे जानेंगे। मूल्यांकन या परीक्षा ही वह साधन है जिससे हम जान पाते हैं की हम कितना जानते हैं। यह बात भी है की हम परीक्षा से भरसक बचना चाहते हैं। परीक्षा हमारे भ्रम को तोड़ती है चाहे भ्रम अवमूल्यन का हो या अतिमूल्यांकन का। परीक्षा से चिंता और तनाव भी होता है। बिना परीक्षा के जीवन सम्भव नहीं है। तो तनाव से बचें या परीक्षा से। मैं समझता हूँ कि परीक्षा से जुड़ी दुश्चिंता व तनाव से जूझने की ताकत ही बढाने का उपाय सोचना चाहिए न कि परीक्षा से बचने के रास्ते खोजने काम करना चाहिए।
हमारे केन्द्रीय शिक्षा मंत्री जी केन्द्रीय परीक्षा परिषद् में हाईस्कूल में परीक्षा को वैकल्पिक बनाने की बात कर वोटबैंक की राजनीति भी कर लेना चाहते हैं। इससे किसका लाभ होनेवाला है। हमारे धनीमानी लोगों के बच्चे तो परीक्षा पास करें। गरीब बेचारे परीक्षाहीन प्रणाली का लाभ लेकर, हाईस्कूल का प्रमाणपत्र लेकर जब आजके प्रतियोगिता के युग में जाएँ तो उन्हें सबसे निचले पायदान पर खडा होने की जगह मिले।
हमारे केन्द्रीय शिक्षा मंत्री जी केन्द्रीय परीक्षा परिषद् में हाईस्कूल में परीक्षा को वैकल्पिक बनाने की बात कर वोटबैंक की राजनीति भी कर लेना चाहते हैं। इससे किसका लाभ होनेवाला है। हमारे धनीमानी लोगों के बच्चे तो परीक्षा पास करें। गरीब बेचारे परीक्षाहीन प्रणाली का लाभ लेकर, हाईस्कूल का प्रमाणपत्र लेकर जब आजके प्रतियोगिता के युग में जाएँ तो उन्हें सबसे निचले पायदान पर खडा होने की जगह मिले।
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