नमस्कार!
हालचाल ठीक है?
तो आज है २६ नवम्बर २००९ है। आज से सालभर पहले कुछ आतंकवादियों ने मुम्बई महानगर ही नहीं पूरे भारत नहीं नहीं पूरे विश्व में अपनी गोलियों के दम पर तहलका मचा कर रख दिया। निश्चय ही कुछ लोग ऐसे जरूर हैं जो आज भी उस रक्तरंजित कार्यवाही से प्रसन्ना होंगे। उन्हें किसी भी व्यक्ति से कोई मतलब नहीं है। उन्हें लगता है की वे कुछ मासूमों की जान लेकर अपनी बात दुनिया के सामने रख सकते हैं। क्या किसी को २६/११ से कोई संदेश मिला शायद नहीं, शायद हाँ। हो सकता है उन आतंकवादियों ने स्वयं या उन्हें भेजने वालों ने किसी को कुछ संदेशदिया हो। वैसे इस बारे में आजतक कोई विशेष चर्चा नहीं हुई है।
मीडिया की कृपा या सौजन्य से पुरानी घटना की जोर शोर से चर्चा चल रही है। जनमानस पुनः उद्वेलित हो उठा है। तमाम लोगों के मन में प्रश्न, शंका, समीक्षा, आलोचना, पुनरावलोकन का दौर चल रहा है। सुरक्षा की तैयारियों वखामियों की जांच चल रही है आरोप प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं। भारत की कार्यशैली के अनुरूप ही तैयारियां हुईहैं। आम आदमी और ख़ास आदमी की उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था न होकर ख़ास ख़ास लोगों की बेहतर और आमलोगों बदतर से ददातर व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गयी है।
आज के दिन उन रक्षाकर्मियों की याद भी आ रही है जिन्होंने अपनी जान से अधिक अपने कर्तव्य को महत्व दिया। कुछ चर्चा उनकी भी हो रही है जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन समुचित रीति से न करके कुछ कोताही कर दी। आज के दिन भी एक ऎसी व्यवस्था नही बन पायी है जो त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित कर सके तथा सारेअत्याधुनिक सुबिधाओं को एक साथ घटनास्थल पर पहुचा सके।
हमारे सारे कार्यों की कुशलता उसी स्तर की होगी जिस स्तर का भ्रष्टाचार हमारे देश में व्याप्त है। हम मंत्रालयों केलिए मारामारी कर सकते हैं। जिम्मेदारी का अवसर आने पर दूसरे लोगों पर तोहमत लगा सकते हैं। आवश्यकसामानों में की खरीदारी में बेवजह देरी, उपयुक्त वस्तु के तलाश में बेपरवाही हमारी आदत में शुमार है। केन्द्र औरप्रदेश के सरकारों केबीच तथा मंत्रालयों के बीच खींचतान आमबात है।
क्या अब हम आशा कर सकते हैं कि हमारे देश में जनसँख्या और दूरी के अनुपात समुचित संख्या में पुलिस बलकी नियुक्ति शीघ्र कर दी जाएगी। उन्हें आज के अपराधियों से निपटने का नियमित प्रशिक्षण देते रहने का उपायकिया जायगा फोरेंसिक प्रयोगशालाएं जनसंख्या के अनुपात में होंगी। वास्तविकता यही है कि हमारे देश में अतिविशिष्ट व्यक्तियों को छोड़कर सामान्य जन के लिए समुचित व्योस्था नहीं है। केवल रास्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के गठनसे अव्यवस्था से सामना नहीं किया जा सकता है। जनता को गुमराह कराने के रास्ते तो बहुत हो सकते हैं।
आज विज्ञान के आधार पर हम जानते हैं कि धरती एक है सभी मानव होमो सैपियन्स हैं। धर्म, जाति, सम्प्रदायसभी मानव के वर्ग विभेद काल्पनिक अवधारणाओं पर आधारित हैं। दुर्भाग्य से शिक्षा के अभाव के कारण हमसभी एक दूसरे को मारने पर उतारू हैं। इस दृष्टिकोण से सोचने पर यही लगता है कि विश्व की सबसे पहलीआवश्यकता है जन जन को शिक्षित करना। जब हम सभी आधुनिक ज्ञान विज्ञान को समझाने लगेंगे तो इस तरहकी घटनाओं पर लगाम लगेगा। मीडिया भी अपनी जिम्मेंदारी को समझते हुए विश्वबंधुत्व को अपना उद्देश्यबनाएगी।
विश्व मानव संघ बनेगा। जो विश्व के मानव के विकास कि चिंता करेगा। देशों की सीमाओं के झगड़े कम होंगे। एकदेश के वासी दूसरे देश के वासी को अपना ही बंधु समझेंगे।
आज के दिन हम विश्व के उन सभी लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जो अपने ही भाईयों के हाथ मारेगये। अपने उन भाईयों को भी श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्य पालन करते हुए अपनी आत्माहुति दी। उन्हेंभी श्रद्धांजलि है जिन्होंने अज्ञानता में अपने ही भाईयों जानें लीं। हम उन सभी परिवारों के प्रति अपनी समानुभूतिव्यक्त करते हैं जो कष्ट में पड़े।
नमस्कार!
जय विश्वबंधुत्व !!
हमारे सारे कार्यों की कुशलता उसी स्तर की होगी जिस स्तर का भ्रष्टाचार हमारे देश में व्याप्त है। हम मंत्रालयों केलिए मारामारी कर सकते हैं। जिम्मेदारी का अवसर आने पर दूसरे लोगों पर तोहमत लगा सकते हैं। आवश्यकसामानों में की खरीदारी में बेवजह देरी, उपयुक्त वस्तु के तलाश में बेपरवाही हमारी आदत में शुमार है। केन्द्र औरप्रदेश के सरकारों केबीच तथा मंत्रालयों के बीच खींचतान आमबात है।
क्या अब हम आशा कर सकते हैं कि हमारे देश में जनसँख्या और दूरी के अनुपात समुचित संख्या में पुलिस बलकी नियुक्ति शीघ्र कर दी जाएगी। उन्हें आज के अपराधियों से निपटने का नियमित प्रशिक्षण देते रहने का उपायकिया जायगा फोरेंसिक प्रयोगशालाएं जनसंख्या के अनुपात में होंगी। वास्तविकता यही है कि हमारे देश में अतिविशिष्ट व्यक्तियों को छोड़कर सामान्य जन के लिए समुचित व्योस्था नहीं है। केवल रास्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के गठनसे अव्यवस्था से सामना नहीं किया जा सकता है। जनता को गुमराह कराने के रास्ते तो बहुत हो सकते हैं।
आज विज्ञान के आधार पर हम जानते हैं कि धरती एक है सभी मानव होमो सैपियन्स हैं। धर्म, जाति, सम्प्रदायसभी मानव के वर्ग विभेद काल्पनिक अवधारणाओं पर आधारित हैं। दुर्भाग्य से शिक्षा के अभाव के कारण हमसभी एक दूसरे को मारने पर उतारू हैं। इस दृष्टिकोण से सोचने पर यही लगता है कि विश्व की सबसे पहलीआवश्यकता है जन जन को शिक्षित करना। जब हम सभी आधुनिक ज्ञान विज्ञान को समझाने लगेंगे तो इस तरहकी घटनाओं पर लगाम लगेगा। मीडिया भी अपनी जिम्मेंदारी को समझते हुए विश्वबंधुत्व को अपना उद्देश्यबनाएगी।
विश्व मानव संघ बनेगा। जो विश्व के मानव के विकास कि चिंता करेगा। देशों की सीमाओं के झगड़े कम होंगे। एकदेश के वासी दूसरे देश के वासी को अपना ही बंधु समझेंगे।
आज के दिन हम विश्व के उन सभी लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जो अपने ही भाईयों के हाथ मारेगये। अपने उन भाईयों को भी श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्य पालन करते हुए अपनी आत्माहुति दी। उन्हेंभी श्रद्धांजलि है जिन्होंने अज्ञानता में अपने ही भाईयों जानें लीं। हम उन सभी परिवारों के प्रति अपनी समानुभूतिव्यक्त करते हैं जो कष्ट में पड़े।
नमस्कार!
जय विश्वबंधुत्व !!
No comments:
Post a Comment