Saturday, May 17, 2014

नई सरकार क्या दूर करेगी भ्रष्टाचार?

नमस्कार!
हालचाल ठीक है. मोदी सरकार बनने वाली है. भाजपा सहयोग लेकर पास हो गई. तृतीय श्रेणी मिली है. लेकिन जनता पार्टी के बाद कांग्रेस को छोडकर भाजपा ही एक राज दल इस समय बचा था. बाम दल व्यक्तिवाद की राजनीति में डूब चुका है उसका उबरना चमत्कार ही होगा. एक वैकल्पिक राजदल उभर रहा है. लेकिन लोकसभा की परीक्षा को पास करना मुश्किल  लग रहा था. लेकिन आआपा  व्यूह कारपोरेट ने तोड दिया. मध्यवर्ग भ्रष्टाचार से त्रस्त तो है किन्तु सीधे  लडना नहीं चाहता, घरबारी आदमी बच बचाकर जी मरते मरते जी लेता है. पैसे वाला मध्यवर्ग नजराना, जबराना, शुकराना, फिरौती मनौती आदि से अपना काम साध लेता है. बीस लाख देकर भी नौकरी मिल जाय तो वह नौकरी दिलाने वाले की आजीवन चरण वन्दना करता रहता है. ऐसी स्थिति में आम आदमी पार्टी को क्या मिलता.

आज के अखबार "रविवासरीय हिन्दुस्तान " में हिन्दुस्तान हिन्दी समूह के सम्पादक श्री शशि शेखर जी का सम्पादकीय निकला है. प्रथम पृष्ठ पर जरूर पढने का निर्देश या आग्रह भी छपा है "नरेन्द्र मोदी को जो करना है"- महगाई और बेरोजगारी को पहला एजेन्डा माना गया है. मैं शशि शेखर के विचारों से प्रायः सहमत नहीं हो पाता हूं. इसलिये आज की असहमति पूर्वाग्रह पूर्ण हो सकती है.

मैं भ्रष्टाचार को ही भारत की दुर्दशा का कारण मानता हूं और मंहगाई तथा बेरोजगारी को उसका बाई प्रोडक्ट. भ्रष्टाचार के कारण रोज बनने वाला काला धन महगाई का पहला कारण है. मंत्रालयों से अस्सी प्रतिशत  लीकेज वाली योजनायें बनाकर पैसा वसूल कर चेक भेजने की परम्परा काला धन भी बनाती है तथा मंत्रालय के लिये मंत्रियों में मार भी कराती हैं. मंत्रालय का बंटवारा योग्यतानुसार न कर राजनैतिक ब्लैकमेलिंग की क्षमता के अनुसार कराने में भ्रष्ट धन की ललक भी छिपी होती है.

भ्रष्टाचार के चलते जनता की जेब से जो अप्रत्यक्ष  कर(  टैक्स) जाता है उसका अधिकतम पचीस प्रतिशत भाग ही सरकार तक पहुंचता है. अतः सरकार पैसे की कमी के नाम पर  नियुक्तियां नहीं करती है और बेरोजगारी बढती है. पूर्व प्रधानमंत्री आई यम यफ की राय पर  सरकारी खर्चे की कटौती के नाम पर सरकारी नियुक्तियों पर रोक लगाकर बेरोजगारी बढा दी . बहुत सारे लोग बेरोजगारी के लिये आबादी को दोष मढ देंगे. किन्तु हमारी आबादी का घनत्व जापान से कम है. सभी सरकारी क्षेत्रों में लगभग चारगुने पद रिक्त हैं. जब ये पद भर जायेंगे तो इसके कारण बहुत रोजगार सृजित हो जायेगा.

भ्रष्टाचार के कारण शिक्षा  की गुणवत्ता का ह्रास होता चला जा रहा है. विद्यालयों की मान्यता के लिये रजभवन तक में फिरौती चल रही है. ऐसे विद्यालयों  से शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग भ्रष्टाचार के अतिरिक्त कुछ नहीं करेंगे. ये कामचोर कर्मचारी बनेंगे.

इसलिये भारत में भ्रष्टाचार ही समस्या है. भारतीय संस्कृति की बात करने वाले वैलेन्टाइन डे पर हंगामा करने, स्कर्ट की साइज नापने की बजाय भ्रष्टों को निशाना बनायें. स्वयं भ्रष्टाचार और सत्ता मद से बचें तो भारत का भला होगा.

रामदेव जी कालाधन वापस मंगा लिजियेगा तीन साल बाद ही मंगा लीजियेगा, अभी तो अपने उत्पादों की गुण्वत्ता सुधारिये तथा अपने उत्पादों के विक्रेताओं से पक्की रसीद दिलवाने की व्यवस्था तो कर दीजिये.

राष्ट्रीय सवयं सेवक संघ, और विश्व हिन्दु परिषद भारत को वास्तव में भ्रष्टाचार मुक्त देखने के लिये उतना ही श्रम करने को तैयार है जितना सरकार बनाने के लिये?
फिर मिलेंगे.
नमस्कार.

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