Wednesday, May 28, 2014

शिक्षा बनाम शिक्षा

नमस्कार!
हालचाल  ठीक है.
मेरे लिये यह हर्ष का विषय है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सबसे युवा कैबिनेट मंत्री मिला है. मननीया स्मृति ईरानी महोदया सफल हैं या असफल यह तो कुछ समय बाद पता चलेगा.
अगर मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करने में सफल हो जांय तो सफल मंत्री सिद्ध होंगी.
पांच साल में शिक्षा का व्यय ६.५ % पहुंचाने में कामयाबी भाजपा और देश दोनों के लिये उत्तम होगा.
शिक्षित और कौशल प्रशिक्षित युवक ही देश को आगे बढा सकता है.
देश के प्रत्येक विकास खण्ड में एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोल दिया जाय और सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक बालक को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के इन्फ्रास्ट्रक्चर, पाठ्यक्रम और शिक्षक मिल जाय तो ही भारत का विकास होगा, विदेशी निवेश से नहीं.
आधुनिक भारत का अपना शिक्षा का माडल होना चाहिये. अब तक के विद्वान मम्त्रियों के कार्यकाल के कारण भारत का कोई भी शिक्षण संस्थान विश्व के टाप टेन मे नहीं है. यदि सालभर के अन्दर पांच शिक्षण संस्थान उस श्रेणी में आ जायें तो लगेगा कि कोई युवा मंत्री आया है.
शिक्षा के क्षेत्र में हर प्रोफेसर कुलपति और फिर मानव संसाधन विकास मंत्री बन जाना चाहता है. जो प्रोफेसर एक विश्वविद्यालय नहीं सम्भाल पाते वे मंत्रालय क्या संभालेंगे. अपनी कक्षा अपने शोधछात्रों से पढवा लेना, जातिवाद और क्षेत्रवाद करना, अपने शोधछात्रों को ही काबिल समझ कर उनकी नियुक्तियां कराना, वस्तुनिष्ठता से कोसों दूर रहना और अपने शोधछात्रों का शोषण करना और अब तो धन ले दे कर नियुक्तियां कराना ही अधिकाधिक प्रोफेसरों का काम रह गया है. जो निष्ठावान, शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी के प्रतिबद्ध प्रोफेसर हैं कृपया इस टिप्पडी पर नाराज होने के पहले अपने मित्रों को ध्यान में अवश्य रखें.
एक युवा मंत्री भारतीय शिक्षा में क्रांतिकारी सिद्ध हो इसी शुभकामना के साथ.
नमस्कार.
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