Friday, November 27, 2009

शिक्षा की परीक्षा

शिक्षा की परीक्षा
नमस्कार !
हालचाल ठीक है?
शिक्षा सबको मिले, कहाँ मिले, कैसे मिले, किसके द्वारा मिले। इसकी चर्चा छोड़कर केवल परीक्षा की चर्चा होती रहती है। जबसे शिक्षा की गुड़वत्ता बढ़ाने का प्रयास किया जाने लगा है शिक्षा समाप्त होने लगी है तथा शिक्षकों की नियुक्ति में सुबिधा शुल्क के चर्चे बढ़ने लगे हैं।वास्तविक स्थिति का ज्ञान न है न हो सकता है। शिक्षा बिना परीक्षा के नहीं हो सकती है, आपने क्या जाना इसे कैसे जानेंगे। मूल्यांकन या परीक्षा ही वह साधन है जिससे हम जान पाते हैं की हम कितना जानते हैं। यह बात भी है की हम परीक्षा से भरसक बचना चाहते हैं। परीक्षा हमारे भ्रम को तोड़ती है चाहे भ्रम अवमूल्यन का हो या अतिमूल्यांकन का। परीक्षा से चिंता और तनाव भी होता है। बिना परीक्षा के जीवन सम्भव नहीं है। तो तनाव से बचें या परीक्षा से। मैं समझता हूँ कि परीक्षा से जुड़ी दुश्चिंता व तनाव से जूझने की ताकत ही बढाने का उपाय सोचना चाहिए न कि परीक्षा से बचने के रास्ते खोजने काम करना चाहिए।

हमारे केन्द्रीय शिक्षा मंत्री जी केन्द्रीय परीक्षा परिषद् में हाईस्कूल में परीक्षा को वैकल्पिक बनाने की बात कर वोटबैंक की राजनीति भी कर लेना चाहते हैं। इससे किसका लाभ होनेवाला है। हमारे धनीमानी लोगों के बच्चे तो परीक्षा पास करें। गरीब बेचारे परीक्षाहीन प्रणाली का लाभ लेकर, हाईस्कूल का प्रमाणपत्र लेकर जब आजके प्रतियोगिता के युग में जाएँ तो उन्हें सबसे निचले पायदान पर खडा होने की जगह मिले।

Thursday, November 26, 2009

विश्व बंधुत्व दिवस

विश्व बंधुत्व दिवस
नमस्कार!
हालचाल ठीक है?
तो आज है २६ नवम्बर २००९ है आज से सालभर पहले कुछ आतंकवादियों ने मुम्बई महानगर ही नहीं पूरे भारत नहीं नहीं पूरे विश्व में अपनी गोलियों के दम पर तहलका मचा कर रख दिया निश्चय ही कुछ लोग ऐसे जरूर हैं जो आज भी उस रक्तरंजित कार्यवाही से प्रसन्ना होंगे उन्हें किसी भी व्यक्ति से कोई मतलब नहीं है उन्हें लगता है की वे कुछ मासूमों की जान लेकर अपनी बात दुनिया के सामने रख सकते हैं क्या किसी को २६/११ से कोई संदेश मिला शायद नहीं, शायद हाँ हो सकता है उन आतंकवादियों ने स्वयं या उन्हें भेजने वालों ने किसी को कुछ संदेशदिया होवैसे इस बारे में आजतक कोई विशेष चर्चा नहीं हुई है

मीडिया की कृपा या सौजन्य से पुरानी घटना की जोर शोर से चर्चा चल रही हैजनमानस पुनः उद्वेलित हो उठा हैतमाम लोगों के मन में प्रश्न, शंका, समीक्षा, आलोचना, पुनरावलोकन का दौर चल रहा हैसुरक्षा की तैयारियों खामियों की जांच चल रही है आरोप प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैंभारत की कार्यशैली के अनुरूप ही तैयारियां हुईहैंआम आदमी और ख़ास आदमी की उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था होकर ख़ास ख़ास लोगों की बेहतर और आमलोगों बदतर से ददातर व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गयी है

आज के दिन उन रक्षाकर्मियों की याद भी रही है जिन्होंने अपनी जान से अधिक अपने कर्तव्य को महत्व दियाकुछ चर्चा उनकी भी हो रही है जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन समुचित रीति से करके कुछ कोताही कर दीआज के दिन भी एक ऎसी व्यवस्था नही बन पायी है जो त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित कर सके तथा सारेअत्याधुनिक सुबिधाओं को एक साथ घटनास्थल पर पहुचा सके

हमारे सारे कार्यों की कुशलता उसी स्तर की होगी जिस स्तर का भ्रष्टाचार हमारे देश में व्याप्त हैहम मंत्रालयों केलिए मारामारी कर सकते हैंजिम्मेदारी का अवसर आने पर दूसरे लोगों पर तोहमत लगा सकते हैंआवश्यकसामानों में की खरीदारी में बेवजह देरी, उपयुक्त वस्तु के तलाश में बेपरवाही हमारी आदत में शुमार हैकेन्द्र औरप्रदेश के सरकारों केबीच तथा मंत्रालयों के बीच खींचतान आमबात है

क्या अब हम आशा कर सकते हैं कि हमारे देश में जनसँख्या और दूरी के अनुपात समुचित संख्या में पुलिस बलकी नियुक्ति शीघ्र कर दी जाएगीउन्हें आज के अपराधियों से निपटने का नियमित प्रशिक्षण देते रहने का उपायकिया जायगा फोरेंसिक प्रयोगशालाएं जनसंख्या के अनुपात में होंगीवास्तविकता यही है कि हमारे देश में अतिविशिष्ट व्यक्तियों को छोड़कर सामान्य जन के लिए समुचित व्योस्था नहीं हैकेवल रास्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के गठनसे अव्यवस्था से सामना नहीं किया जा सकता हैजनता को गुमराह कराने के रास्ते तो बहुत हो सकते हैं

आज विज्ञान के आधार पर हम जानते हैं कि धरती एक है सभी मानव होमो सैपियन्स हैंधर्म, जाति, सम्प्रदायसभी मानव के वर्ग विभेद काल्पनिक अवधारणाओं पर आधारित हैंदुर्भाग्य से शिक्षा के अभाव के कारण हमसभी एक दूसरे को मारने पर उतारू हैंइस दृष्टिकोण से सोचने पर यही लगता है कि विश्व की सबसे पहलीआवश्यकता है जन जन को शिक्षित करनाजब हम सभी आधुनिक ज्ञान विज्ञान को समझाने लगेंगे तो इस तरहकी घटनाओं पर लगाम लगेगामीडिया भी अपनी जिम्मेंदारी को समझते हुए विश्वबंधुत्व को अपना उद्देश्यबनाएगी

विश्व मानव संघ बनेगाजो विश्व के मानव के विकास कि चिंता करेगादेशों की सीमाओं के झगड़े कम होंगेएकदेश के वासी दूसरे देश के वासी को अपना ही बंधु समझेंगे

आज के दिन हम विश्व के उन सभी लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जो अपने ही भाईयों के हाथ मारेगयेअपने उन भाईयों को भी श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्य पालन करते हुए अपनी आत्माहुति दीउन्हेंभी श्रद्धांजलि है जिन्होंने अज्ञानता में अपने ही भाईयों जानें लींहम उन सभी परिवारों के प्रति अपनी समानुभूतिव्यक्त करते हैं जो कष्ट में पड़े

नमस्कार!
जय विश्वबंधुत्व !!

Monday, November 23, 2009

फुटपाथ

फुटपाथ
नमस्कार!
क्या हालचाल है?
क्या यह विष्मय की बात नहीं है कि फुटपाथ जैसी उपेक्षित चीज भी किसी सभ्यता या देश के सभ्य होने का सूचकहैयहीं पर प्रश्न उठाता है कि सभ्य होने और विकसित होने में अन्तर है अथवा नहीं? यह वादविवाद का विषय हैमैं यहाँ पर इस विवाद में पड़ना भी नहीं चाहता हूँवैसे भी आजकल विकास के आगे सभ्यता को कौन पूछता हैतथ्य होने पर भी मान लिया गया है कि जो जितना ही विकसित है उतना ही सभ्य भी हैसभ्यता और विकासकी बात को छोड़कर आइए फुटपाथ की ओर चलें

वास्तव में फुटपाथ सभ्य होने का सूचक हो हो विकसित होने का सूचक अवश्य हैबिना फुटपाथ वाली सड़क परबाइक , साइकिल या पैदल चलते हुए चारपहिया वाहनों के आने पर पूरी सड़क उन्हीं के हवाले कर ही देना पड़ता हैयदि आपने ऐसा नहीं किया तो आपका जीवन खतरे में पड़ सकता है अथवा दो चार गालियों से दो चार होना पड़सकता हैअपने महान भारत देश में नगरों में फुटपाथ सहित सडकों का अभाव भी है और चलन भी नहीं हैमहामहानगरों में सडकों के किनारे फुटपाथ होते तो जरूर हैं पर उनकी हालत उतनी ठीक नहीं है जीतनी होनी चाहिएबी और सी श्रेणी के शहरों में फुटपाथ नाम मात्र के होते हैंवहाँ पर इतनी ही चौड़ी जगह उपलब्ध होती है कि मुख्य सड़क ही फुटपाथ जितनी चौड़ी बन पाती हैदूसरे जहाँ चौड़ी सड़क बनाने कि जगह होती है वहाँ सड़कबनाने भर का धन ही मुहैया हो पाता हैजनता सड़क देखकर ही निहाल हो जाती है फुटपाथ की कौन सोचे?

महा महानगरों की यातायात समस्या का निवारण फ्लाईओवर बनवाने की अपेक्षा फुटपाथों की ओर ध्यान देने सेही सुलझेगीअभी भी कहीं पर भी चाहे नगर हो महानगर हो चाहे ग्राम पैदल चलने वालों की संख्या सबसे अधिकहै, उसके बाद आते हैं साइकिल वाले फिर मोटरसाइकिल वाले तब आते हैं कार वाले

अभी हाल ही में बीस नवम्बर को अंग्रेजी दैनिक " हिन्दू" के आखिरी पन्ने पर एक रोचक तथा उपयोगी समाचार छपा हैउस समाचार को देखकर मुझे अपनी समस्या याद गयीकाश हमारे महान भारत के नगर विकास केनीति नियामक तथा लोक निर्माण विभाग के नीति नियामक इस समाचार के मर्म को समझते हुए योजनाएंबनाएंगेनयी बन रही स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क पर साइकिल चालाक तथा पदयात्री उसी प्रकार सुख से यात्रा करसकेंगे जिस प्रकार कार वाले यात्रा करते हैं

नमस्कार !
फिर मिलेंगे।


































Sunday, November 15, 2009

सचिन और भारत में खेल

सचिन और भारत में खेल
नमस्कार !
का हो का हालचाल बा ? ठीक बा नू ?

आज के सब अखबार आ टीवी में सचिन छवले बाने। वैसे "मीडिया" (आजकाल ईहे न कहाता) में राजनीति की बाद खेले के नंबर ह। ओकरी बाद नंबर आवेला अपराध के। हँ त सचिन के बात करत रहनी हँ । सचहूँ के सचिन के कौनो जोड़ नईखे। उनुके जेतना तारीफ कईल जा ऊ कम बा। ख़ास बात ईहो रहल ह की ऊनुकी गुरू रमाकांत अचरेकर ( द्रोणाचार्य पुरस्कार ) के तारीफ भी कईल गईल ह।

आज की अखबार में ईहो चर्चा रहल ह की प्राइमरी विद्यालय के लइकन में होखे वाला मधुमेह के कारण ई बा कि उन्हन की इस्कूलन में खेले के जगहिए नईखे। ई बहुत दुःख के बात बा। ऐ घरी के केन्द्र के शिक्षामंत्री कपिल सिब्बल भाई कुछु नया करे खातिर बहुत अकुताइल बाने। का ऊ ई क सकेले कि सगरी देश के प्राईमरी इस्कूलन में सगरी लईकन के ठीकठाक कमरा में बईठे के जगह आ हर कक्षा के अलग अलग मास्टर के इंतजाम हो जाऊ। साथे साथे इस्कुलवन में लइकन के खेलेके जागाही मिले खेल सिखावे वाला मास्टर होखें। खेल तन आ मन दूनू के सेहत ठीक राखेला। खेल बहुत जरूरी ह। देश के खेल मंत्रालय अगर देश की कुल्ही लइकन के खेले के व्यवस्था न क सकेला त का करी खाली एही झगरा में परल रही लोग कि ई प्रान्त के काम ह कि केन्द्र के।

खेल के सितारा सचिन बनल रहे। साथे साथे ऐ देश के सगरी लईकन के खेले के जगह मिलो। ईहे कामना बा।

Saturday, November 14, 2009

१४ नवम्बर

१४ नवम्बर
नमस्कार !
हालचाल ठीक है?

आज भारत में बाल दिवस और पूरी दुनिया में मधुमेह दिवस हैभारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन भी हैस्कूलों में चाचा नेहरू को याद किया गया, बच्चों केलिए कार्यक्रम हुएमधुमेह के रोगियों कोसावधान किया गया, डराया गयाकुछ छुट्टी मनायेविचार किया गया कि नेहरू की आर्थिक नीतियाँ प्रासंगिक हैंया नहीं

Friday, November 13, 2009

शिक्षा दिवस

शिक्षा दिवस
नमस्कार !
क्या हालचाल है?

११ नवम्बर भारत में गत वर्ष से शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जा रहा हैसच बताऊँ मैं आज यह जान पाया। "हिदुस्तान दैनिक " में ११ नवम्बर को मधुमेह दिवस (१४ नवम्बर ) के बारे में लेख छापा थाअंगरेजी दैनिक "हिंदू" में एक विज्ञापन जरूर छापा था किंतु देवरिया में यह अखबार देर से आता हैइस दिवस के बारे में औरजानने के लिए इन्टरनेट का सहारा लिया तो सबसे पहली सूचना बिहार से मिली जहाँ पटना में बिहार केमुख्यमन्त्री माननीय नीतीश कुमार जी की उपस्थिति में मौलाना अबुल कलाम आजाद( ११ नवम्बर १८८८ - २२ pharavarii १९५८) के जन्मदिन को शिक्षा दिवस के रूप में मनाया गया



Thursday, November 12, 2009

तूफान

नमस्कार !
क्या हालचाल है ?

कल देश एक खतरनाक तूफान से बच गयालेकिन जो बवंडर लगातार देश में बरबादी मचाये हुवे है उससे कैसे बंचेकोई कहेगा "अन्धकार को क्यों कोसे हम आओ अपना दीप जलाएं "। जब हम अंधेरे में चलते हैं तो राह भी खोजते हैं और कहते भी हैं कि बड़ा अँधेरा हैलाख भ्रस्ताचारियों में से एक के पकड़े जाने पर मीडिया और लोग दोनों के लिए वादविवाद का अच्छा अवसर हाथ लग जाता हैयह भी ध्यान देने वाली बात है कि हमारे देश के जिम्मेदार सरकारी नेता जो विभाग सम्हाले हुए हैं वो क्या करते रहते हैंवे खिलाड़ी हैं, दर्शक हैं, सहयोगी हैं अथवा और कुछकुछ दिनों तक चर्चा चलेगी फिर वही ढाक के तीन पातगलती तो हर मनुष्य से होती हैकुछ सीमा तक हम गलतियों की अनदेखी भी करते हैंवह सीमा क्या हो यह असीमित समय तक चलने वाले वादविवाद का विषय हो सकता हैदेश में कानून का राज्य है यह प्रर्दशित होता रहे इसके लिए तो राजनेता तत्पर हैं अधिकारी ही नागरिकहम जिसे भी सरकार कहें उसकी जिम्मेदारी सबसे अधिक हैइसी लिए ही सरकार बनाई जाती है



Wednesday, November 11, 2009

का हो का हालचाल बा । सब ठीक बा नू । आजकाल ज़माना बड़ा ख़राब बा । महगाई, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, गरीबी के रोना त हरदम से चर्चा के बाति रहल ह । आ एहिंगा आदमी जीयत खात चली आवता। अच्छा चलतानी फेरु भेंट होई.

pahali baat

I just started here to share my views in bhojpuri and tried transliteration facility but failed to do so. I will try to share my haalchaal in bhojpuri and hindi. It is difficult to me to share my ideas easily in English.Today, the first day of my blogging ido not want to say nothing.