Sunday, October 13, 2013

विजयादशमी

विजयादशमी

नमस्कार!
हालचाल ठीक ही है. आज विजयादशमी, आश्विन, शुक्लपक्ष, विक्रमीय संवत २०७०,  चौदह अक्टूबर २०१३  है. हर्ष का पर्व है. भारतीय परम्परानुसार क्षत्रिय लोग शस्त्रपूजन करते हैं. दशहरा का मेला और छुट्टी. एक हंसी खुशी का त्यौहार , दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की तिथि. यह सब कुछ आज अधर में लटका हुआ है. एक भयंकर तूफान पायलिन/फेलिन उडीसा से उत्तर पश्चिम की ओर बढते हुये कमजोर पडता जा रहा है. उसके प्रभाव से देवरिया में कल से ही बरसात हो रही है. कल रात से अबतक लगातार मध्यम गति से मध्यम हवा के साथ वर्षा ने उत्सव और और समारोह पर वास्तव में पानी फेर दिया है. सरकार की चैतन्यता से तूफान से सम्भावित जनहानि को बचा लिया गया है. किन्तु मध्यप्रदेश में दतिया के पास देवीदर्शन के समय प्रशासन की चूक से भयंकर भगदड में ९० लोग मर गये सैकडों घायल हो गये. तूफान प्रभावित क्षेत्र को छोडदिया जाय तो लोग बरसात के बाद आनन्दोत्सव में व्यस्त हैं.

राम भारत में भक्ति, अध्यात्म, समाज और राजनीति सबको अत्यधिक प्रभावित करने वाला व्यक्तित्व है. भारत में राम से निरपेक्ष रहना कठिन है. कभी राम के साथ कभी राम के विरोध में. इस समय जब मैं यह ब्लाग टंकित कर रहा हूं साथ साथ जगजीत सिंह का राम भजन सुन रहा हूं. कथा के अनुसार राम का अवतार एक काल विशेष में एक कार्य विशेष  के लिये हुआ था. वह कार्य सम्पन्न कर राम ने जलसमाधि ले लिया.

अब राम के नाम पर केवल राजनीति चल रही है. वह राजनीति भक्ति की हो या शक्ति की. लोग अपनी बुद्धि के अनुरूप राम की व्याख्या में लगे हैं. इसके अतिरिक्त  शैव, वैष्णव, शाक्त,  तांत्रिक, मान्त्रिक, वामाचारी, अघोरी आदि न जाने कितने लोग लोगों को लुभाकर उनकी श्रद्धा के कारण अपने नाम और धाम को चमका रहे हैं. मनुष्य के जन्म के साथ ही तरह तरह की समस्यायें शुरु हो जाती हैं, इन सभी समस्याओं का निराकरण किसी स्पष्ट वैज्ञानिक विधि से सम्भव नहीं हो पाता. जिन समस्याओं का निराकरण सपष्ट है उसके लिये कोई राम के पास नहीं जाता. लेकिन असमाधानशील समस्याओं ्के निवारण के लिये लोग अवैज्ञानिक विधियों का सहयोग लेते हैं इसमें लगभग सभी आ जाते हैं.

राम रामलीला के बहाने बचपन में जो आनन्द दे जाते हैं वह आजीवन रस देता रहता है. और दशहरा मनाया जाता रहेगा. जब हम किसी भी खेल में जीत होने पर इतने मगन हो जाते हैं तो एक समय के राष्ट्र के जीत पर लोगों ने खुशी मनायी और वह चल रही है. आधुनिक लोग तो सचिन को भी भगवान बना चुके हैं. जो बचपन में आत्मसात हो जाता है उसे बाद के ज्ञान और तर्क द्वारा भले ही मानस से निकालने का प्रयास किया जाय वह पुनः स्थापित हो जाता है. साम्स्कृतिक परिवर्तन और जीवन की आवश्यकता के कारण बहुत सी विचित्र बातें दिखाई देने लगती हैं. यह व्यक्ति के मूल्य का प्रश्न है.

भोजपुरी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को दुर्गा भसान कहते हैं. आज दुर्गा भसान का दिन भी है वर्षा हो रही है. आज स्थगित ही होगा लोग इसे अब पूर्णिमा तक ले जा सकते हैं.

इन सारी गतिविधियों के सक्रिय भागीदार, समर्थक, निरपेक्ष, विरोधी, निन्दक,  सभी को अपना लक्ष्य मिल जाय और किसी के मन में कोई ग्रंथि न रहे, सभी मानसिक रूप से स्वस्थ रहें यही त्यौहार की उपयोगिता है.

नमस्कार.

No comments:

Post a Comment