Monday, January 6, 2014

आम आदमी और चुनाव के मुद्दे

नमस्कार!
हालचाल ठीक है.
२०१४ के संसदीय आम चुनाव का प्रचार जोरों पर है. मीडिया और चौपाल सभी जगह एक ही चर्चा कौन जीतेगा. किस राजदल को कौन सी रणनीति अपनानी चाहिये.
भारत के नागरिक को, भोजन, वस्त्र, आवास,शिक्षा, चिकित्सा,न्याय,सुरक्षा कैसे मिल सकेगी? कौन इसे देने की बात कर रहा है? केजरीवाल, मोदी, राहुल, मायावती, मुलायम या कोई और.
भाजपा ने कर्म्चारियों के पेंशन योजना को बिना सोचे समझे समाप्त कर दिया अभी तक उसका पूरा पूरा  समाधान नहीं हो पाया है. मोदी के विकास के माडल में पूंजीवाद ही चलेगा. भले ही उनकी माताजी घरेलू नौकरानी थी वे मजदूरों की बात नही करेंगे आज उनके प्रिय कारपोरेट घराने हैं.वे चाय जब बेचते थे तब बेचते थे अब उनके मन में गरीबों को और गरीब बनाने का सूत्र है.
वे सबको समान और गुणवत्ता पुर्ण शिक्षा देने की बात नहीं कर सकते. ्गुजरात के सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय मानक नहीं हैं. वहां के हर नागरिक को हर स्तर की अत्याधुनिक चिकित्सा की सुविधा नहीं है. वहां पर भी न्याय शीघ्रता से नहीं मिलता है.

आज भारत की जनता मूल्भूत मुद्दों पर राय जानना चाहती है.वह रोजी-रोटी, भोजन-छाजन या रोटी, कपडा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, न्याय  ौर सुरक्षा की चिन्ता में है. इन समस्याओं का समाधान किस दल के पास है? उसका खाका बताये और जाकर जनता की सेवा करे. सता और कुर्सी केलिये ठीका पर कब्जा के लिये मुखौटा बदल कर विधायिका के रास्ते सता पर कब्जा की नीयत छीड दे.
नमस्कार!


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