Thursday, January 30, 2014

बापू जी नमस्कार

नमस्कार!
हालचाल ठीक है.
आज मौनी अमावस्या है. मौन रहकर स्नान करने का दिन. भारतीय परम्परा का एक पर्व, समारोह, मेला, सेमिनार सबकुछ. इस सेमिनार में लोग कुछ ज्ञान देते हैं कुछ लेते हैं. अपना खाना लेकर जाते हैं. कुछ दूसरे का खाते हैं दूसरे को खिलाते हैं.
अभी लम्बे काल तक यह पर्व चलेगा. अभी सेमिनारों और उनके द्वारा प्राप्त निष्कर्षों का जो हाल है, सबको पता है उससे कुछ को धन और कुछ को मान तथा कुछ को भविष्य के लिये प्रमाण-पत्र मिल जाता है. इस तरह के सेमिनार माघ मेला जैसे नहीं हो गयें हैं. जो सेमिनार में न जाय उसे उसकी आलोचना नहीं करनी चाहिये.
आज ३० जनवरी है. अहिंसा के पुजारी को भारत में गोली मार दी गयी. तमाम लोग दुखी हुये और कुछ मिठाई भी बांटे. आज भी गांधी का मूल्यांकन जारी है. गांधी की हत्या में सम्मिलित लोगों को कोई अपराधबोध नहीं है.
भारत की स्वतंत्रता के जितने भी कारण गिनाये जाय उसमें सबसे अधिक योगदान गांधी का माना जाता है. वर्तमान लोकसेवक और जनसेवक दोनों ही गांधी का नाम जरुर लेते हैं. भारत के राज-काज में गांधी की रेखा दिखाई देती रहती है. कम से कम  साल में दो बार सरकार और अखबार उनको चर्चा में ला देते हैं.
२९ जनवरी २०१४ को बीटिंग-रिट्रीट समारोह में २०सालों बाद पुरानी स्वर्णिम बघ्घी पर सवार होकर भारत के राष्ट्रपति समारोह मेम सम्मिलित होने आये.
गांघी के सिद्धान्त तो मानने वालों के लिये ही हैं. भारत के गवर्नर जनरल को कितना खर्च करना चहिये इसपर गांधी जी टिप्पणी किये थे. आज राष्ट्रपति पर भारत के औसत प्रति व्यक्ति आमदनी के किते गुना व्यय होता है इसका भी लेखा किसी न किसी के पास होगा. अन्तिम व्यक्ति कीआमदनी का हिसाब भी किसी न किसी के पास होगा ही.
आज जो लोग राजघाट गये होंगे उन सभी के दिलों को गांधी प्रेरित नहीं कर सकते. गांधी की प्रेरणा उन्हीं को मिलेगी जो उनसे प्रेरणा लेना चाहेंगे. फिर भी मैं आशा करता हूं कि इरोम शर्मिला को न्याय मिलेगा. देश के अन्तिम व्यक्ति को भी अच्छी शिक्षा मिलेगी. सभी के सवास्थ्य की देख्रेख हो जायेगी.
लुटियन दिल्ली  की सभी इमारतों को गिरा करके अंग्रेजों की गुलामी के अवशेष समाप्त कर दिये जायेंगे. वहां पर आधुनिक जनतंत्र के मानक के अनुसार भवन बनेगे. जनता को अपनी बात कहने के लिये एक विशाल मैदान मिलेगा.
बापू जी नमस्कार.

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