Wednesday, January 8, 2014

शर्म-शर्म

नमस्कार!
हालचाल बहुत खराब है.
भीषण ठंढक है.
यनडीटीवी पर प्राइम टाइम में दिल्ली में दिल्लीवालों के लिये आरक्षण पर बहस चल रही है. अत्यन्त निराशाजनक स्थिति मे टीवी देखना बंद कर दिया. लेकिन सोने भी नहीं जा सका. अब अपनी बात लिख रहा हूं .शायद शान्ति मिल जाय.
कांग्रेस, भाजपा और आआपा तीनों दलों की शिक्षा की नीति का क्या कहना तीनों क्षेत्रीय आरक्षण की वकालत कर रहे हैं. अभी भी समय है तोनों दल भारत की जनता से माफी मांग लें.
दिल्ली से पढकर निकले सारे राजनेता, और अधिकारी जो दिल्ली में हैं उन्हें भी देश से माफी मांगनी चाहिये. यूजीसी के सभी अधिकारी जो ८०% लीकेज वली योजनाओं पर धन व्यय करते हैं उन्हे माफी मांगनी चाहिये.
देश के सभी सांसदों को देश से माफी मांगनी चाहिये.
दिल्ली राज्य  में १५ वर्षों से शासन कर रही कांग्रेस दिल्ली से १२वीं पास छात्रों को उच्च शिक्षा देने में असमर्थ रही है. केन्द्र में शासन कर चुकी भाजपा और कांग्रेस  को यह आवश्यक नहीं लगा कि दिल्ली की उच्च शिक्षा की  हालत में सुधार करें.
देश के तमाम राज्यों को विकास के नाम पर गलियाते पत्रकार, विद्वान और स्तम्भकार इस सत्य और तथ्य को नकारते रहे. दिल्ली और जनेवि के जुझारू नेता कुछ नहीं कर पाये.
एशियाड और कामनवेल्थ खेलों में पानी जैसा पैसा बहाने वालों शिक्षा के लिये क्या कर र्हे थे. देश के नेता शिक्षा के जो आंकडे बताते हैं वे किस बूते पर बताते हैं.
सबसे अधिक तरस आआपा के नीतिकारों और योगेन्द्र यादव पर आ रहा है. आप दिल्ली वालों को आरक्षण की बात कांग्रेस और भाजपा की तौर पर दिया. आआपा कह सकती थी कि दिल्ली से १२वीं  पास हर छात्र को उच्च शिक्षा की व्यवस्था कर दी जायेगी.
आआपा तो ६.५% शिक्षा पर व्यय करने के सपने को पूरा करे.
दिल्ली के सभी आवासीय बडे बंगलों को विद्यालय बना दीजिये. कुछ ही बंगलों में बहुमंजिली इमारतें बनाकर सबको शिफ्ट कर दीजिये.
नमस्कार.

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