नमस्कार!
हालचाल ठीक है.
इस वर्ष २६ जनवरी को देवरिया में ठंढक बहुत थी, तेज हवा भी. कालेज गया था. झंडा फहराने के साथ उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र का वाचन सुना. महाविद्यालय के जलपान समारोह के बाद घर के लिये मिठाई लिया. २६ जनवरी राष्ट्रीय पर्व के साथ बडी पुत्री के विवाह का दिन भी है.
कैमरा साथ ले गया था. ठंढ के कारण साहस नहीं हुआ. केवल रास्ते में पांच चित्र लिये. तीन को फेसबुक पर लगा दिया.
घर आकर बाहर निकला पुष्पों का छायाचित्र लेने. आजकल कुछ पुष्पों का रोज छाया चित्र लेकर उन्हें ही फेसबुक पर लगाता रहता हूं. बाहर निकट के विद्यालय के छोटे बच्चे समारोह से उल्लास के साथ लौट रहे थे.
अपना बचपन याद आया. एक दिन तो झंडा बनाने और कईन ( बांस की टहनी) की व्यवस्था में लग जाता था. झंडा ऊंचा करने के लिये एक बित्ते (लगभग नौ इन्च) के झंडे में दस फुट की टहनी. हंसी भी आरही थी. आजकल बनाबनाया प्लास्टिक का सुन्दर झंडा मिलता है.
तीन बच्चों में से सबसे छोटा बच्चा अपना झंडा लहराते लगातार नारा लगा रहा था- भावत माता की जय, भावत माता की जय, भावत माता की जय..........भारत का उच्चारण भारत, उसका उल्लास, आवाज की खनक से ध्वनित हो रही थी.......
उसका उल्लास बना रहे, वह आगे चलकर उसके कार्य भारत की जय लायक हों......
पीछे मुडकर देखने पर विकास भी दिखाई देता है, लूट भी दिखाई देती है,
संविधान का वादा......................नेताओं के भाषण.............................अपना कार्यकलाप ............
सपने.......सच्चाइयां......भूल.......झूठ.........सच.......................................................................................................................भावत माता की जय.......
रात को चिन्मय पूछता है आप झंडा फहराने कालेज गये........................
भावत...............माता ...................की .........................जय.
किंशुक अभिनय के साथ सारे जहां से अच्छा हमारा गा रहे हैं...........................
भावत माता की जय............
हालचाल ठीक है.
इस वर्ष २६ जनवरी को देवरिया में ठंढक बहुत थी, तेज हवा भी. कालेज गया था. झंडा फहराने के साथ उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र का वाचन सुना. महाविद्यालय के जलपान समारोह के बाद घर के लिये मिठाई लिया. २६ जनवरी राष्ट्रीय पर्व के साथ बडी पुत्री के विवाह का दिन भी है.
कैमरा साथ ले गया था. ठंढ के कारण साहस नहीं हुआ. केवल रास्ते में पांच चित्र लिये. तीन को फेसबुक पर लगा दिया.
घर आकर बाहर निकला पुष्पों का छायाचित्र लेने. आजकल कुछ पुष्पों का रोज छाया चित्र लेकर उन्हें ही फेसबुक पर लगाता रहता हूं. बाहर निकट के विद्यालय के छोटे बच्चे समारोह से उल्लास के साथ लौट रहे थे.
अपना बचपन याद आया. एक दिन तो झंडा बनाने और कईन ( बांस की टहनी) की व्यवस्था में लग जाता था. झंडा ऊंचा करने के लिये एक बित्ते (लगभग नौ इन्च) के झंडे में दस फुट की टहनी. हंसी भी आरही थी. आजकल बनाबनाया प्लास्टिक का सुन्दर झंडा मिलता है.
तीन बच्चों में से सबसे छोटा बच्चा अपना झंडा लहराते लगातार नारा लगा रहा था- भावत माता की जय, भावत माता की जय, भावत माता की जय..........भारत का उच्चारण भारत, उसका उल्लास, आवाज की खनक से ध्वनित हो रही थी.......
उसका उल्लास बना रहे, वह आगे चलकर उसके कार्य भारत की जय लायक हों......
पीछे मुडकर देखने पर विकास भी दिखाई देता है, लूट भी दिखाई देती है,
संविधान का वादा......................नेताओं के भाषण.............................अपना कार्यकलाप ............
सपने.......सच्चाइयां......भूल.......झूठ.........सच.......................................................................................................................भावत माता की जय.......
रात को चिन्मय पूछता है आप झंडा फहराने कालेज गये........................
भावत...............माता ...................की .........................जय.
किंशुक अभिनय के साथ सारे जहां से अच्छा हमारा गा रहे हैं...........................
भावत माता की जय............
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