नमस्कार!
हालचाल ठीक है,
चार फरवरी को बसन्तपंचमी है. जिसका प्रचलन कम होता जा रहा है, आउट आफ फैशन. वैलेन्टाइन डे या चौदह फरवरी नया बसन्तोत्सव दिवस है. जो अंग्रेजी पर्व है वह नवउदारवादी व्यापार को मदद करनेवाला होता जा रहा है. अमिताभ बच्चन और हेमामालिनी ने बागवान फिल्म के माध्यम से अपने समवयस्कों को भी वैलेन्टाइन डे से जोड दिया है. मोबाइल और स्मार्टफोन और विज्ञापन सब कुछ मिलाकर बसन्त को अधिक रंगीन करने पर जोर दे रहे हैं.
इस वर्ष का जाडा है जाने का नाम ही नहीं लेता, लोग बसन्तपंचमी को भी दांत कटकटाते हुये मिलेंगे. परसो नेट पर देख कर कह दिया कि मौनी अमावस्या को धूप होगी. किसी ने कहा बसन्तपंचमी तक जाडा ऐसे ही बना रहेगा, किसी और ने कहा आठ फरवरी तक. इस वर्ष आधा पूरा माघे कम्बल कांधे रहेगा.
इधर बसन्त का दस्तक होता है और टैक्स विशेषज्ञ आयकर का राग अलापने लगते हैं. आयकर विभाग का नाम सुनते ही भय हो जाता है. उनकी हर चिट्ठी में दंड का जिक्र होता है. बचपन में गांव में मालगुजारी वाले लाल पगडी और मोटा डंडा लेकर आते और लोगों के बैल खोलकर लेकर चले जाते (तब हल और बैलों से जुताई होती थी) . पीछे-पीछे किसान, हाथ जोडते, माई बाप करते पहुंच जाते. अजकल भी हर सरकारी विभाग और कर्मचारी सरकार ही कहलाना पसन्द करते हैं.
बजट में सबसे चर्चित आयकर ही है. वैट को लोग ध्यान नहीं देते, उत्पाद कर को कोई पूछता ही नहीं, सेवाकर का भी यही हाल है. सारे लोगों की निगाह में मध्यवर्ग की एक नम्बर की आमदनी निगाह में होती है. आयकर भी कई तरह का होता है. आजकल, कभी महिला कभी वरिष्ठ नागरिक, हिन्दू अविभक्त परिवार आदि कई तरह से जोडा जाता है. पता नहीं कितनी धाराओं छूट मिलती है.
१-मुझे लगता है कि व्यक्ति के लिये सबसे अधिक व्यय का काल ३५-६० वर्ष तक का होता है. इसलिये अस आयु वर्ग के लोगों को छूट मिलनी चाहिये.
२- आय का योग समस्त स्रोत से कर लिया जाता है किन्तु उस आय पर कितने जीवन निर्वाह करते हैं इसका ध्यान नहीं रखा जाता है. आश्रित संतति या माता, पिता, भाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता. प्रत्येक परिवार में प्रति व्यक्ति आमदनी के आधार पर ही कर लगाया जाना चाहिये.
३- एक व्यक्ति के सामान्य और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिये प्रतिव्यक्ति व्यय के अनुसार आमद्नी को करमुक्त रखना चाहिये. इसे प्रतिवर्ष फुटकर मूल्य सूचकांक के अनुसार बदला जाना चाहिये. जैसे पिछले वित्तवर्ष में दो लाख था तो इस वित्त वर्ष में दो लाख पचीस हजार होना चाहिये.
४- बचत पर छूट के भी तमाम अभ्यास हुये अब इसे एक लाख किया गया है. जिसकी आमदनी तीन लाख है उसे भी एक लाख तथा जिसकी आमदनी बीस लाख है उसे भी एक लाख. सामान्यतः इसे तीस प्रतिशत कर देना चाहिये और इसकी सीमा भी दस लाख तक ले जाना चाहिये.
५- आयकर की तीन दरें ही है. १०%, २०%और ३०%. इसे निम्न प्रकार करना चाहिये-
५ लाख तक ५%
१० लाख तक १०%
१५ लाख तक १५%
२० लाख तक २०%
२५ लाख तक २५%
१ करोड तक ३०%
२ करोड तक ३५%
अधिक पर ४०%
६- बकायेदारों और कर प्रवंचकों को तरह तरह की छू ट मिलती है किन्तु जो समय से पूर्व अप्रैल से कर देते हैं उन्हें कोई छूट नहीं मिलती है. जो जितना पहले से जितना अधिक कर दे उसे उतना ही अधिक छू ट देना चाहिये. जो सारा भुगतान अप्रैल में कर दे उसे और छूट देना चाहिये.
इस ठंढ को बचाने में आयकर और बजट की गर्मी से कुछ राहत मिली है शायद आपको भी राहत मिले.
नमस्कार.
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